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8 महीने से वेतन नहीं, 25 महीने से EPFO भी अटका! बिजनौर के मनरेगा कर्मचारियों ने डीएम से लगाई गुहार

8 महीने से वेतन बंद, 25 महीने से EPFO गायब! बिजनौर के मनरेगा कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, डीएम से लगाई न्याय की गुहार

हर महीने वेतन से ₹3,464 की कटौती, लेकिन EPFO खाते में नहीं पहुंची रकम; परिवार चलाना हुआ मुश्किल
 रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद बिजनौर में मनरेगा योजना के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों का सब्र अब जवाब देने लगा है। 8 महीने से मानदेय नहीं मिलने और 25 महीने से EPFO की राशि कर्मचारियों के खातों में जमा न होने के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। परेशान कर्मचारियों ने अब जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है।

मनरेगा इंजीनियर्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के माध्यम से दिए गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने दावा किया है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं, हर महीने वेतन से ₹3,464 EPFO के नाम पर काटे जाने के बावजूद यह राशि उनके यूएएन (UAN) खाते में जमा नहीं की जा रही।

‘वेतन नहीं, भविष्य भी अधर में’

तकनीकी सहायकों का कहना है कि पिछले आठ महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, बैंक की किस्तें, घर का किराया और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती बन चुका है।

दूसरी ओर, लगभग 25 महीनों से EPFO जमा न होने के आरोप ने कर्मचारियों की भविष्य की सामाजिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हर महीने कट रही रकम, फिर पैसा कहां गया?

ज्ञापन के अनुसार कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से EPFO की कटौती की जा रही है, लेकिन संबंधित खातों में राशि जमा नहीं हो रही। यदि यह दावा सही है तो यह केवल वेतन भुगतान का मामला नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय भी बन जाता है।

डीएम से की तत्काल कार्रवाई की मांग

कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—

  • 8 माह का लंबित मानदेय तत्काल जारी कराया जाए।
  • 25 माह की EPFO राशि कर्मचारियों के UAN खातों में जमा कराई जाए।
  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

TargetTvLive विश्लेषण

मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजना की सफलता उन तकनीकी कर्मचारियों पर टिकी होती है, जो गांव-गांव जाकर विकास कार्यों की निगरानी करते हैं। यदि यही कर्मचारी महीनों तक वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ से वंचित रहें, तो इसका असर केवल उनके परिवारों पर ही नहीं बल्कि विकास कार्यों की गति पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ज्ञापन में लगाए गए आरोप कर्मचारियों के दावे हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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