EXCLUSIVE: 25 महीने से अटका मनरेगा कर्मचारियों का PF! बिजनौर में ₹2.13 करोड़ का भुगतान रुका, ₹76 लाख सामग्री मद की राशि भी होल्डिंग खातों में फंसी
10 सरकारी पत्र भी नहीं आए काम, विकास खंडों में करोड़ों रुपये अटके; कर्मचारियों ने बीडीओ की हठधर्मिता को बताया बड़ी वजह, प्रशासन में मचा हड़कंप
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। जनपद बिजनौर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) और ईएफएमएस (e-FMS) भुगतान को लेकर बड़ा प्रशासनिक संकट सामने आया है। विभागीय अभिलेख बताते हैं कि पिछले सात महीनों में लगातार दस बार पत्र जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारियों के खातों में करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं हो सका। इससे हजारों मनरेगा कर्मियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
मामले को और गंभीर बनाती है वह जानकारी, जिसके अनुसार करीब 76 लाख रुपये की सामग्री मद (Material Component) की राशि, जो तकनीकी सहायकों से संबंधित बताई जा रही है, आज भी विभिन्न विकास खंडों के होल्डिंग खातों में पड़ी हुई है। इसके बावजूद यह धनराशि पात्र मनरेगा कर्मियों के खातों तक नहीं पहुंच सकी है।
लगातार 10 पत्र, फिर भी भुगतान नहीं
कार्यालय द्वारा 19 जनवरी 2026 से 29 जून 2026 के बीच लगातार दस पत्र जारी कर सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और मनरेगा लेखाकारों को ईएफएमएस भुगतान तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद अधिकांश विकास खंडों में भुगतान लंबित बना हुआ है।
ताजा पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कर्मचारियों का ईएफएमएस विकास खंडों के होल्डिंग खातों में उपलब्ध है, लेकिन उसे समय पर ईपीएफओ और कर्मचारियों के खातों में स्थानांतरित नहीं किया गया।
₹2.13 करोड़ का भुगतान लंबित, ₹76 लाख सामग्री मद में भी फंसे
विभागीय आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विकास खंडों में लगभग ₹2.13 करोड़ का ईएफएमएस भुगतान लंबित है। इसके अतिरिक्त लगभग ₹76 लाख की सामग्री मद की राशि, जो तकनीकी सहायकों से संबंधित बताई जा रही है, अभी भी विकास खंडों के होल्डिंग खातों में पड़ी हुई है।
मनरेगा कर्मचारियों का आरोप है कि धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद कई विकास खंडों में बीडीओ की हठधर्मिता और प्रशासनिक उदासीनता के कारण भुगतान जारी नहीं किया जा रहा। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
EPFO की कार्रवाई का खतरा
दस्तावेजों के अनुसार M/S Uttar Pradesh Gramin Rojgar Guarantee Yojna, District Rural Development Agency, Vikas Bhawan, Bijnor के विरुद्ध कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 की धारा 14B एवं 7Q के अंतर्गत 01 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2024 तक की अवधि के लिए लगभग ₹1.28 करोड़ की देनदारी दर्ज की गई है। यह राशि विलंबित जमा के कारण ब्याज और दंड के रूप में बढ़ी है।
यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो विभाग के विरुद्ध वसूली की कार्रवाई तेज हो सकती है।
आयुक्त ग्राम्य विकास ने मांगी रोजाना रिपोर्ट
कार्यालय के ताजा निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पूरे मामले की निगरानी आयुक्त ग्राम्य विकास स्तर से की जा रही है। सभी विकास खंडों से प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट मांगी जा रही है, जिससे शासन की गंभीरता साफ दिखाई देती है।
सबसे ज्यादा सवाल बीडीओ की कार्यप्रणाली पर
मनरेगा कर्मचारियों का कहना है कि धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद यदि महीनों तक भुगतान लंबित रहता है तो इसका सीधा असर कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ता है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई विकास खंडों में फाइलें जानबूझकर लंबित रखी जा रही हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।
बड़ा सवाल
जब शासन लगातार निर्देश दे रहा है, आयुक्त ग्राम्य विकास स्वयं निगरानी कर रहे हैं और धनराशि भी होल्डिंग खातों में उपलब्ध है, तो आखिर मनरेगा कर्मचारियों के खातों में भुगतान क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी या फिर करोड़ों रुपये की यह फाइलें आगे भी दफ्तरों में ही घूमती रहेंगी?
अब पूरे जनपद की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
(यदि इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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