“भूसा बना ‘सोना’, किसानों का फूटा गुस्सा!” बिजनौर में गत्ता फैक्ट्री पर अवैध खरीद के आरोप, डीएम दरबार पहुंचा किसान संघ
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बिजनौर में बड़ा मुद्दा: भूसा खरीद पर छिड़ी किसान बनाम उद्योग की जंग
बिजनौर में किसानों और उद्योग के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। भारतीय किसान संघ ने जिले में संचालित एक गत्ता (कार्डबोर्ड) फैक्ट्री पर भूसे की अवैध खरीद का गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
जिला अध्यक्ष राजकुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और संगठन पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
क्यों भड़का किसान संघ?
किसानों का कहना है कि—
- फैक्ट्री बड़े पैमाने पर भूसा खरीद रही है
- स्थानीय बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही है
- पशुपालकों को चारे के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है
👉 सीधा असर:
- दूध उत्पादन प्रभावित
- छोटे किसानों की लागत बढ़ी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव
ज्ञापन में क्या मांगें रखी गईं?
किसान संघ ने प्रशासन से मांग की—
✔️ अवैध खरीद की तत्काल जांच हो
✔️ दोषी फैक्ट्री पर सख्त कार्रवाई
✔️ भूसे की खरीद-बिक्री के लिए स्पष्ट नियम लागू हों
✔️ स्थानीय किसानों और पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाए
ये रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरे
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई अहम पदाधिकारी मौजूद रहे—
- कोषाध्यक्ष जितेंद्र
- जिला महिला प्रमुख सीमा त्यागी
- मोहम्मदपुर देवमल से कल्याण सिंह और रूपेंद्र सिंह (खंड अध्यक्ष)
- हल्दौर ब्लॉक अध्यक्ष पुष्पराज
- नूरपुर ब्लॉक अध्यक्ष अनिल त्यागी
- हल्दौर मंत्री कर्मेंद्र
- मार्गदर्शक रमेश गुरुजी
इन सभी ने एक स्वर में प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
विश्लेषण: क्या उद्योगों को खुली छूट सही?
यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े सवाल को जन्म देता है—
👉 क्या उद्योगों को कृषि उप-उत्पादों की असीमित खरीद की छूट मिलनी चाहिए?
👉 या पहले स्थानीय जरूरतों—पशुपालन और किसानों—को प्राथमिकता मिलनी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है:
अगर भूसा जैसे संसाधनों पर बड़े उद्योगों का नियंत्रण बढ़ता है, तो
➡️ डेयरी सेक्टर प्रभावित होगा
➡️ छोटे किसान आर्थिक संकट में आ सकते हैं
ग्राउंड रिपोर्ट: भूसा क्यों है इतना अहम?
भूसा सिर्फ फसल का अवशेष नहीं, बल्कि—
✔️ पशुओं का मुख्य आहार
✔️ दूध उत्पादन की रीढ़
✔️ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
👉 इसकी कमी सीधे तौर पर दूध की कीमत और किसानों की आय को प्रभावित करती है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अब नजरें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं—
- क्या जांच कमेटी बनेगी?
- क्या फैक्ट्री पर कार्रवाई होगी?
- या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
👉 यह फैसला तय करेगा कि जिले में किसान बनाम उद्योग की इस जंग का अंजाम क्या होगा।
TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर का यह मुद्दा अब प्रदेश स्तर पर कृषि नीति और औद्योगिक संतुलन की बहस को तेज कर सकता है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।












