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बिजनौर सूचना विभाग में बड़ा बदलाव: विवादों के बीच नए सूचना अधिकारी की तैनाती, क्या अब होगी जवाबदेही तय?

बिजनौर सूचना विभाग में बड़ा बदलाव: विवादों के बीच नए सूचना अधिकारी की तैनाती, क्या अब होगी जवाबदेही तय?

मान्यता विवाद, RTI सवाल, ऑडियो क्लिप प्रकरण और खाली पदों के बीच शासन ने बदला जिम्मेदार अधिकारी
विशेष संवाददाता | TargetTvLive

बिजनौर। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत हरदोई से संबद्ध अधिकारी संतोष कुमार को बिजनौर में तैनात किए जाने के बाद जिले के प्रशासनिक और पत्रकारिता जगत में नई चर्चा शुरू हो गई है। यह तबादला ऐसे समय हुआ है जब बिजनौर का सूचना विभाग पिछले कई महीनों से लगातार विवादों, आरोपों और प्रशासनिक सवालों के केंद्र में बना हुआ है।

सूचना विभाग को लेकर स्थानीय स्तर पर उठ रहे प्रश्न केवल कार्यालय संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पत्रकार मान्यता प्रक्रिया, सूचना के अधिकार (RTI) मामलों, विभागीय पारदर्शिता, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और कर्मचारियों के आचरण तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में नए अधिकारी की तैनाती को कई लोग विभाग में सुधार और जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

तबादला आदेश ने बढ़ाई चर्चाएं

प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति 2026-27 के अंतर्गत जारी आदेश में संतोष कुमार को बिजनौर भेजा गया है। विभागीय हलकों में इस बदलाव को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से अधिक महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि जिस समय यह आदेश जारी हुआ है, उस समय विभाग कई सवालों से घिरा हुआ है।

वर्षों से रिक्त हैं महत्वपूर्ण पद

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह शिकायत उठती रही है कि जिला सूचना अधिकारी, एकाउंटेंट और लिपिक जैसे महत्वपूर्ण पद नियमित रूप से भरे नहीं जा सके। विभाग का संचालन वैकल्पिक व्यवस्थाओं और अतिरिक्त प्रभार के सहारे चलता रहा।

सूत्रों के अनुसार इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, मीडिया समन्वय और कार्यालयीय कार्यों की गति पर पड़ा है। कई जानकारों का मानना है कि रिक्त पदों ने विभाग की संस्थागत क्षमता को कमजोर किया।

मान्यता प्रक्रिया पर उठते रहे सवाल

बिजनौर में पत्रकार मान्यता प्रक्रिया भी समय-समय पर विवादों में रही है। स्थानीय पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत के कुछ वर्गों ने पात्रता, दस्तावेजों की जांच और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

हालांकि इन आरोपों पर किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। नए अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभाग और पत्रकार समुदाय के बीच विश्वास बहाली की मानी जा रही है।

RTI मामलों ने भी बढ़ाई असहजता

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाओं को लेकर भी विभाग पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए गए कि कई मामलों में समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई अथवा अधूरी जानकारी दी गई।

पारदर्शिता के पैरोकारों का कहना है कि सूचना विभाग से अपेक्षा की जाती है कि वह स्वयं सूचना उपलब्ध कराने के मामले में आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करे।

ऑडियो क्लिप विवाद ने बढ़ाई संवेदनशीलता

हाल के दिनों में सामने आने का दावा किए जा रहे एक ऑडियो क्लिप ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। कुछ स्थानीय माध्यमों में यह दावा किया गया कि कथित बातचीत में मुख्यमंत्री के संदर्भ में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग हुआ है।

कुछ दावों में सूचना विभाग से जुड़े कर्मचारी का नाम भी सामने आया, लेकिन अब तक ऑडियो की कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष की ओर से भी सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि मामला सार्वजनिक होने के कई दिन बाद भी किसी औपचारिक जांच या विभागीय कार्रवाई की घोषणा सामने नहीं आई।

प्रचार सामग्री और जनजागरूकता अभियान पर भी प्रश्न

सूचना विभाग का मूल उद्देश्य सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना है। लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए गए कि शासन से प्राप्त प्रचार सामग्री का पर्याप्त उपयोग नहीं हो सका और कई जनसंपर्क गतिविधियां अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाईं।

यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो इसका सीधा प्रभाव सरकारी योजनाओं की पहुंच और जनजागरूकता अभियानों पर पड़ सकता है।

नए अधिकारी के सामने क्या होंगी प्राथमिकताएं?

विशेषज्ञों के अनुसार नए सूचना अधिकारी के सामने प्रमुख चुनौतियां होंगी—

  • पत्रकार मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
  • RTI मामलों के निस्तारण में सुधार लाना।
  • विभागीय कार्यप्रणाली को संस्थागत और जवाबदेह बनाना।
  • सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को प्रभावी बनाना।
  • मीडिया और प्रशासन के बीच विश्वास बहाल करना।
  • विभाग से जुड़े विवादों पर स्पष्ट और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाना।

अब सबकी निगाहें आगे की कार्रवाई पर

बिजनौर सूचना विभाग में हुए इस प्रशासनिक बदलाव ने एक बार फिर उन तमाम मुद्दों को चर्चा में ला दिया है जो पिछले लंबे समय से उठते रहे हैं। हालांकि आरोपों और दावों की अंतिम सत्यता किसी सक्षम जांच या आधिकारिक प्रक्रिया से ही तय होगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि विभाग के सामने विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी चुनौती मौजूद है।

अब देखना होगा कि नए अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली में कितना बदलाव दिखाई देता है और क्या लंबे समय से उठ रहे सवालों के जवाब जनता तथा मीडिया जगत को मिल पाते हैं।

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