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बिजनौर में बड़ा एक्शन: 7 दिन में बदलेगा सिस्टम! AI ट्रेनिंग अनिवार्य, 100% नामांकन का टारगेट

मिशन कर्मयोगी व ‘स्कूल चलो’ पर बड़ा फोकस: बिजनौर में 7 दिन का स्पेशल ड्राइव, AI ट्रेनिंग से लेकर 100% नामांकन तक सख्त निर्देश

📍 बिजनौर | 01 अप्रैल 2026। TargetTvLive 

बिजनौर प्रशासन ने सरकारी सिस्टम की कार्यक्षमता और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक साथ दो बड़े अभियानों पर फोकस तेज कर दिया है। 02 से 08 अप्रैल तक चलने वाले ‘मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह’ को लेकर मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब “ट्रेनिंग और परफॉर्मेंस” दोनों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

विदुर सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक मशीनरी को एक्टिव मोड में लाते हुए CDO ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया—अब सिर्फ योजनाएं नहीं, रिजल्ट चाहिए।

क्या है मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह?

यह अभियान भारत सरकार के Capacity Building Commission के तहत चलाया जा रहा है, जिसका मकसद सरकारी कर्मचारियों की क्षमता, दक्षता और कार्यशैली में सुधार लाना है।

👉 प्रमुख निर्देश:

  • सभी अधिकारी/कर्मचारी iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर कम से कम 4 घंटे का Role-based Learning पूरा करें
  • AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और iGOT मार्केटप्लेस से जुड़े कोर्स अनिवार्य रूप से अपनाएं
  • तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी 100% प्रशिक्षण दिया जाए

विश्लेषण:
यह पहली बार है जब जिला स्तर पर AI आधारित प्रशिक्षण को इतने आक्रामक तरीके से लागू करने की कोशिश हो रही है। इससे प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल दक्षता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

शिक्षा पर फोकस: “एक भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए”

बैठक में शिक्षा विभाग को लेकर सबसे ज्यादा सख्ती देखने को मिली। CDO ने स्पष्ट कहा:

👉 हर बच्चे का स्कूल में नामांकन अनिवार्य किया जाए
👉 ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे
👉 ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर पुनः नामांकन
👉 स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग से डेटा लेकर पैरेंट्स तक सीधा संपर्क

विश्लेषण:
बिजनौर में ड्रॉपआउट और अनियमित उपस्थिति लंबे समय से चुनौती रहे हैं। इस बार प्रशासन ने हेल्थ, आंगनबाड़ी और शिक्षा विभाग को जोड़कर डेटा-ड्रिवन अप्रोच अपनाने की रणनीति बनाई है, जो ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।

ग्राउंड एक्शन: रैली से लेकर घर-घर संपर्क तक

  • शहर और गांवों में जागरूकता रैलियां
  • घर-घर संपर्क अभियान
  • अभिभावकों को सीधे जोड़कर नामांकन के लिए प्रेरित करना

विश्लेषण:
सिर्फ सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी से ही शिक्षा अभियान सफल होता है। इसीलिए इस बार प्रशासन “कम्युनिटी एंगेजमेंट मॉडल” पर काम कर रहा है।

प्रशासन का सख्त रुख

CDO रणविजय सिंह ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया कि:

  • शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन हो
  • किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
  • हर विभाग अपनी प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित करे

कौन-कौन रहे मौजूद?

बैठक में प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह
  • जिला विद्यालय निरीक्षक जयकरण यादव
  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना
  • अन्य जिला स्तरीय अधिकारी

निष्कर्ष (Conclusion)

बिजनौर में यह अभियान सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार और शिक्षा क्रांति की संयुक्त पहल बनता दिख रहा है।
एक तरफ जहां सरकारी कर्मचारियों को AI और डिजिटल ट्रेनिंग से अपडेट किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

👉 अगर निर्देशों का सही क्रियान्वयन हुआ, तो यह मॉडल दूसरे जिलों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

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