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Transfer के बाद भी Payment? “किसके आदेश से हुआ भुगतान?” “नजीबाबाद में पंचायत फंड पर सवाल”

तबादले के बाद भी सरकारी धन का भुगतान? नजीबाबाद ब्लॉक में पंचायत सचिव पर उठे गंभीर सवाल, जाने! “कानून क्या कहता है”

अवनीश त्यागी का खोजपूर्ण समाचार 

24 फरवरी को हुआ स्थानांतरण, फिर भी दो ग्राम पंचायतों में भुगतान का आरोप — क्या यह वित्तीय नियमों का उल्लंघन है या सिस्टम की मिलीभगत?

बिजनौर।

नजीबाबाद ब्लॉक में तैनात रहे पंचायत सचिव राकेश कुमार के स्थानांतरण के बाद भी सरकारी धनराशि के भुगतान का आरोप सामने आने से पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 24 फरवरी 2026 को नजीबाबाद से नूरपुर ब्लॉक में स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद ग्राम पंचायत अमीखानपुर बीरूवाला और भोगपुर में राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि का भुगतान कर दिया गया।

मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और पंचायत से जुड़े सूत्रों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर तबादले के बाद भी सचिव ने भुगतान कैसे किया, और यदि किया तो किसकी अनुमति से किया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थानांतरण के बाद पंचायत सचिव वित्तीय भुगतान कर सकता है?

इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए जरूरी है कि पंचायत राज से जुड़े नियमों और कानूनों को देखा जाए।

कानून क्या कहता है?

1. पंचायत सचिव की नियुक्ति और स्थानांतरण का अधिकार

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत सचिव की नियुक्ति और कार्यप्रणाली Uttar Pradesh Panchayat Raj Act, 1947 के तहत संचालित होती है।

इस अधिनियम के अनुसार पंचायत सचिव ग्राम पंचायत का प्रशासनिक कर्मचारी होता है और उसे सरकार या अधिकृत अधिकारी द्वारा एक ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में स्थानांतरित किया जा सकता है।

👉 इसका मतलब साफ है कि

  • सचिव जिस ग्राम पंचायत या ब्लॉक में तैनात है,
  • वही उसका प्रशासनिक और वित्तीय कार्यक्षेत्र होता है।

स्थानांतरण के बाद उसका पूर्व कार्यक्षेत्र समाप्त हो जाता है।

2. पंचायत निधि के भुगतान का नियम

पंचायत निधि से किसी भी प्रकार का भुगतान करने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है।

पंचायत लेखा नियमों के अनुसार:

  • ग्राम पंचायत के बैंक खाते से पैसा ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर निकाला जाता है।
  • भुगतान प्रधान और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है।
  • सभी भुगतान का रिकॉर्ड कैशबुक और खातों में दर्ज किया जाना अनिवार्य होता है।

इसका अर्थ यह है कि सचिव वित्तीय प्रक्रिया का प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी होता है।

3. तबादले के बाद भुगतान क्यों माना जाता है गंभीर मामला

प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार जब किसी पंचायत सचिव का स्थानांतरण हो जाता है तो:

  1. उसे जल्द से जल्द रिलीव किया जाता है
  2. वह नए सचिव को चार्ज सौंपता है
  3. चार्ज हस्तांतरण के बाद उसके पास वित्तीय अधिकार नहीं रहते

यदि इसके बाद भी भुगतान होता है तो यह स्थिति तीन तरह के सवाल खड़े करती है:

  • क्या सचिव को जानबूझकर रिलीव नहीं किया गया?
  • क्या भुगतान विभाग की जानकारी में हुआ?
  • या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत से सरकारी धन निकाला गया?

4. वित्तीय अनियमितता कैसे बनती है

पंचायत प्रशासन के नियमों के अनुसार:

  • सचिव को पंचायत निधि का हिसाब रखना होता है
  • हर भुगतान बजट और स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार होना चाहिए
  • गलत भुगतान या नियम विरुद्ध निकासी वित्तीय अनियमितता मानी जाती है

यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन और धन की वसूली तक की कार्रवाई हो सकती है।

5. जिम्मेदारी किन पर तय हो सकती है

ऐसे मामलों में आमतौर पर जांच इन बिंदुओं पर होती है:

  1. पंचायत सचिव – जिसने भुगतान किया
  2. ग्राम प्रधान – जिसने कार्य स्वीकृत कराया
  3. ब्लॉक स्तर के अधिकारी – जिन्होंने निगरानी नहीं की
  4. पंचायत राज विभाग – जिसने स्थानांतरण के बाद भी नियंत्रण नहीं किया

यदि यह साबित हो जाए कि भुगतान जानबूझकर कराया गया, तो इसे सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में भी माना जा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि:

  • यदि 24 फरवरी को स्थानांतरण आदेश जारी हो गया था
  • तो सचिव को उसी समय रिलीव क्यों नहीं किया गया?
  • और यदि रिलीव नहीं किया गया, तो क्या उन्हें भुगतान की अनुमति थी?

इन सवालों के जवाब केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकते हैं।

निष्कर्ष

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ एक सचिव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सकता है। इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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