बिजनौर में ‘बाढ़ आपातकाल’ का रियल सीन! गंगा बैराज पर सायरन बजते ही कूदी NDRF, डूबते लोगों का लाइव रेस्क्यू – देखें प्रशासन की बड़ी तैयारी

📍 बाढ़ से पहले बिजनौर में बड़ा ‘रिहर्सल’, प्रशासन ने परखी अपनी असली ताकत
विश्लेषणात्मक समाचार रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
बिजनौर, 17 फरवरी 2026। मानसून से पहले संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए बिजनौर प्रशासन ने गंगा बैराज स्थल पर जिला स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित कर आपदा प्रबंधन सिस्टम की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया। इस मॉक अभ्यास में सायरन बजते ही राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (NDRF), पुलिस, स्वास्थ्य, फायर, होमगार्ड और राजस्व विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं और डूबते लोगों का रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
यह मॉक ड्रिल जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने की।
सायरन बजते ही शुरू हुआ ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’, मोटरबोट से बचाई गई जानें
मॉक ड्रिल का सबसे अहम और रोमांचक दृश्य तब सामने आया जब अचानक आपदा का सायरन बजा और NDRF के जवान मोटरबोट लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में उतरे।
- डूबते हुए लोगों को बाहर निकाला गया
- फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया
- बेहोश और घायल लोगों को एंबुलेंस से अस्थायी अस्पताल भेजा गया
यह पूरा ऑपरेशन वास्तविक बाढ़ आपदा की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया।
शीश महल बना अस्थायी अस्पताल, मेडिकल टीम रही हाई अलर्ट पर
बाढ़ आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी जांचने के लिए शीश महल को अस्थायी अस्पताल बनाया गया।
यहां मौजूद थे:
- एंबुलेंस और मेडिकल टीम
- पैरामेडिकल स्टाफ
- प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था
रेस्क्यू किए गए घायल और बेहोश लोगों को तुरंत भर्ती कर इलाज का अभ्यास किया गया।
हर विभाग ने निभाई भूमिका, प्रशासन ने दिखाई ‘फुल तैयारी’
इस मॉक ड्रिल में कई विभागों ने मिलकर काम किया:
- NDRF और PAC – रेस्क्यू ऑपरेशन
- स्वास्थ्य विभाग – मेडिकल सहायता
- फायर विभाग – आपात स्थिति नियंत्रण
- राजस्व विभाग – संसाधन प्रबंधन
- होमगार्ड और आपदा मित्र – सहयोग
कार्यक्रम के अंत में आपदा मित्रों को लाइफ जैकेट और उपकरण देकर सम्मानित किया गया।
पहले हुई टेबल टॉक मीटिंग, बनाई गई रणनीति
मॉक ड्रिल से पहले अधिकारियों की टेबल टॉक बैठक हुई, जिसमें आपदा के समय:
- कौन विभाग क्या करेगा
- रेस्क्यू की प्रक्रिया क्या होगी
- संसाधनों का उपयोग कैसे होगा
इन सभी बिंदुओं पर रणनीति तैयार की गई।
विश्लेषण: क्यों बेहद अहम है यह मॉक ड्रिल?
बिजनौर गंगा किनारे स्थित जिला है और हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है।
इस मॉक ड्रिल से:
✔ प्रशासन की तैयारी का परीक्षण हुआ
✔ विभागों के बीच समन्वय मजबूत हुआ
✔ रेस्क्यू समय और प्रतिक्रिया क्षमता की जांच हुई
✔ आपदा मित्रों को वास्तविक अनुभव मिला
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी मॉक ड्रिल वास्तविक आपदा के दौरान जान बचाने में निर्णायक साबित होती हैं।
कौन-कौन रहे मौजूद
- अपर जिलाधिकारी वान्या सिंह
- एसडीएम सदर रितु चौधरी
- जिला सूचना अधिकारी हर्ष चावला
- NDRF कमांडर सूर्य कुमार
- आपदा विशेषज्ञ प्रशांत श्रीवास्तव
- स्वास्थ्य, पुलिस, फायर, सिंचाई, राजस्व विभाग के अधिकारी
निष्कर्ष: क्या बिजनौर बाढ़ से निपटने के लिए तैयार है?
गंगा बैराज पर हुए इस हाई-लेवल मॉक ड्रिल से यह साफ संकेत मिला कि बिजनौर प्रशासन बाढ़ आपदा से निपटने के लिए सतर्क और तैयार है।
हालांकि असली परीक्षा मानसून के दौरान होगी, लेकिन यह अभ्यास जिले के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
#TargetTvLive #Bijnor #FloodMockDrill #NDRF #GangaBarrage #DisasterManagement #UPNews #BreakingNews #FloodPreparedness












