290वें दिन भी नहीं थमा बिजली कर्मचारियों का आंदोलन: वेतन बकाया, छंटनी और निजीकरण पर गहराया संकट
लखनऊ, 13 सितंबर 2025।
उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों का निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के खिलाफ चल रहा आंदोलन आज 290वें दिन में प्रवेश कर गया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में हजारों बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के सभी जनपदों, परियोजनाओं और पावर हाउसों में जोरदार प्रदर्शन किया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: 9 महीने से संघर्ष
- पिछले 9 महीनों से बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ संघर्षरत हैं।
- समिति का कहना है कि सरकार और प्रबंधन, निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए कर्मचारियों पर दमनकारी नीतियाँ थोप रहे हैं।
- आंदोलन के दौरान कई बार वार्ता की कोशिशें हुईं लेकिन न तो वेतन भुगतान हुआ, न ही छंटनी रोकी गई।
सबसे बड़ा मुद्दा: वेतन बकाया
- संघर्ष समिति का आरोप है कि जून, जुलाई और अगस्त माह का वेतन अभी तक हजारों कर्मचारियों को नहीं मिला है।
- फेसियल अटेंडेंस सिस्टम की खामियों का बहाना बनाकर कर्मचारियों की तनख्वाह रोकी गई।
- तीन माह से वेतन न मिलने के बावजूद कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं, जिसे समिति ने “उत्पीड़न की चरम सीमा” बताया।
संविदा कर्मचारियों की छंटनी से गहराया संकट
- मई माह में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की छंटनी की गई।
- 55 वर्ष से अधिक उम्र वाले हजारों संविदा कर्मियों को बाहर कर दिया गया।
- “डाउन साइजिंग” के नाम पर भी कई हजार कर्मचारियों को हटाया गया।
- समिति ने चेताया कि इससे प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराने लगी है, क्योंकि तकनीकी और लाइन स्टाफ की कमी हो गई है।
रियायती बिजली सुविधा पर विवाद
- संघर्ष समिति का आरोप है कि निजीकरण के बाद बिजली कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाली रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने की साजिश की जा रही है।
- इसी के तहत उनके घरों पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
- समिति ने इसे कर्मचारियों का “अधिकार छीनने की कार्रवाई” बताया।
प्रदेशभर में एकजुटता
आज आंदोलन के तहत कर्मचारियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, अलीगढ़, बरेली, झांसी, अयोध्या, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अनपरा, ओबरा, पिपरी सहित प्रदेश के सभी बड़े जिलों और परियोजनाओं में प्रदर्शन किया।
- बड़ी परियोजनाएं प्रभावित: हरदुआगंज, जवाहरपुर, पनकी, परीक्षा प्रोजेक्ट्स में भी धरना-प्रदर्शन हुआ।
- शहर से गाँव तक गूंजा विरोध: छोटे जिलों में भी बिजली कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की।
आंदोलन की प्रमुख हाइलाइट्स
- 290वां दिन: आंदोलन 9 महीनों से जारी, अब तक का सबसे लंबा विरोध।
- वेतन बकाया: हजारों कर्मचारियों को तीन माह से वेतन नहीं मिला।
- संविदा संकट: 55 साल से ऊपर के हजारों संविदा कर्मियों की छंटनी।
- स्मार्ट मीटर विवाद: जबरन मीटरिंग को कर्मचारी अधिकारों पर हमला बताया।
- प्रदेशव्यापी असर: वाराणसी से लेकर नोएडा और अनपरा तक हर जगह विरोध।
विश्लेषण: क्या है आगे का रास्ता?
इस आंदोलन ने न केवल बिजली कर्मचारियों को बल्कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था को भी संवेदनशील मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
- यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बिजली उत्पादन और वितरण प्रभावित हो सकता है।
- लगातार आंदोलन से सरकार और प्रबंधन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद केवल “कर्मचारियों का वेतन” नहीं बल्कि “ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण बनाम सार्वजनिक नियंत्रण” की बड़ी लड़ाई है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का साफ कहना है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं होता और कर्मचारियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयाँ रद्द नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
लगातार 290 दिन का यह संघर्ष अब सरकार और बिजली विभाग की नीतियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।












