नवरात्रि पर बांदा के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

बांदा। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के लिए जिले के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मां के दर्शन कर सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की। हालांकि, मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद मंदिरों में प्रशासन की ओर से कोई विशेष अनुष्ठान आयोजित नहीं किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में असंतोष देखने को मिला।
प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री ने पहले ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे कि मंदिरों में पूजा-अनुष्ठान की समुचित व्यवस्था की जाए, लेकिन आदेशों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभी तक जिला प्रशासन ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। इससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर रोष है।
मंदिरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी थी। मंदिरों के भीतर और बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। श्रद्धालु परंपरागत तरीके से लेटकर परिक्रमा करते हुए मंदिर पहुंचे और मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आस्था और अव्यवस्था का मिला-जुला रूप
श्रद्धालुओं की भक्ति में कोई कमी नहीं दिखी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही ने धार्मिक आयोजन की गरिमा को कम करने का काम किया। ट्रस्टियों और मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
क्या कहता है मंदिर प्रशासन?
मंदिर ट्रस्टी ने कहा, “जिला प्रशासन को पहले से ही सूचना दी गई थी कि नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष अनुष्ठानों की व्यवस्था की जाए, लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई संपर्क नहीं किया।” इससे स्पष्ट है कि सरकार के आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर उनकी अनुपालना नहीं हो रही है।
श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार
भले ही प्रशासन की ओर से अनुष्ठान की कोई व्यवस्था न की गई हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। हजारों की संख्या में भक्तजन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।
बांदा में नवरात्रि का पर्व पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही ने भक्तों की श्रद्धा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना और जिला प्रशासन की निष्क्रियता से स्पष्ट होता है कि धार्मिक आयोजनों के प्रति प्रशासन की रुचि सीमित है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो और धार्मिक आयोजनों को सुचारू रूप से संपन्न किया जाए।












