चांदपुर में अवैध मेडिकल स्टोर्स संचालन : भ्रष्टाचार के जाल में फंसा प्रशासन, जनता की सेहत पर संकट
BIJNOR. चांदपुर नगर में अवैध रूप से संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर्स का मामला अब गंभीर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रदीप नामक व्यक्ति, जो कथित रूप से मेडिकल एसोसिएशन के स्थानीय पदाधिकारी हैं, पर इन अवैध स्टोर्स के संचालन के लिए मोटी रकम वसूलने के आरोप हैं। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि ड्रग इंस्पेक्टर की निष्क्रियता और कार्यालय से लगातार अनुपस्थिति ने इस अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया है।
प्रदीप की संदिग्ध भूमिका:
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स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रदीप ने अवैध मेडिकल स्टोर्स को संचालित करने के लिए भारी रिश्वत ली है। यह आरोप चिकित्सा क्षेत्र में गहरे पैठे भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है, जहां नियमों की धज्जियां उड़ाकर मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

ड्रग इंस्पेक्टर की लापरवाही:
ड्रग इंस्पेक्टर ने पहले अपने पिता की बीमारी का बहाना बनाकर कार्रवाई से बचने की कोशिश की थी। हालांकि, उनके पिता का निधन हुए महीनों बीत चुके हैं, फिर भी उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उनकी कार्यालय से लगातार अनुपस्थिति और कार्रवाई न करने की प्रवृत्ति ने प्रशासनिक ढांचे की कमजोरी को उजागर किया है। कार्यालय अध्यक्ष भी इस मामले में कोई कार्रवाई करने में असमर्थ दिख रहे हैं, जो प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है।
जनता की सेहत पर मंडराता खतरा:
प्रशासन की इस निष्क्रियता से अवैध मेडिकल स्टोर्स की संख्या में वृद्धि हो रही है, जिससे नकली या अवैध दवाओं का प्रसार संभव है। यह स्थिति मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। यदि प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
चांदपुर में अवैध मेडिकल स्टोर्स का यह प्रकरण प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति उदासीनता को उजागर करता है। आवश्यक है कि उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि चिकित्सा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और जनता का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।












