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विद्युत कर्मियों ने महाकुंभ में बिजली आपूर्ति का इतिहास रचने की ठानी

विद्युत कर्मियों ने महाकुंभ में बिजली आपूर्ति का इतिहास रचने की ठानी, निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन जारी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के विद्युत कर्मियों ने महाकुंभ में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बताया कि कुंभ नगर में 28, 29 और 30 जनवरी को बिजली कर्मी किसी भी विरोध प्रदर्शन से दूर रहकर महाकुंभ को विद्युत सेवा की उत्कृष्ट व्यवस्था से रोशन करेंगे। मौनी अमावस्या के दिन 29 जनवरी को प्रयागराज और पूरे प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

महाकुंभ में ऐतिहासिक बिजली व्यवस्था

संघर्ष समिति ने कुंभ नगर की बिजली व्यवस्था को विश्व का सबसे बड़ा अस्थायी बिजली नेटवर्क बताया। इसके तहत 4.25 लाख अस्थायी कनेक्शन, 85 विद्युत उपकेंद्र, 182 किमी एचटी लाइन, 1400 किमी एलटी लाइन और 340 वितरण ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। 52,000 बिजली के खंभों के जरिए विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक उपकेंद्र पर दोहरी बिजली आपूर्ति और प्रमुख केंद्रों पर तीन स्तरीय आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।

नासा ने महाकुंभ में जल रही 75,000 एलईडी लाइटों की तस्वीरें साझा कर इस ऐतिहासिक विद्युत नेटवर्क को विश्व पटल पर रखा है। संघर्ष समिति ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में श्रद्धालुओं की सेवा के लिए बिजली कर्मी दिन-रात जुटे रहेंगे।

निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन

संघर्ष समिति ने निजीकरण के खिलाफ पूरे प्रदेश में प्रदर्शन तेज कर दिया है। लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर और अन्य जिलों में मोमबत्ती जुलूस निकाले गए। समिति ने दावा किया कि अगर निजीकरण होता, तो महाकुंभ में प्रति यूनिट बिजली 20-30 रुपये की दर से मिलती। उज्जैन महाकुंभ में निजी कंपनी द्वारा बिजली आपूर्ति से इनकार करने का उदाहरण देते हुए समिति ने कहा कि प्रयागराज का महाकुंभ भी उसी स्थिति का सामना कर सकता था।

29 जनवरी को नहीं होगा कोई विरोध प्रदर्शन

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने घोषणा की है कि मौनी अमावस्या के दिन 29 जनवरी को महाकुंभ में और पूरे प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सर्वोत्तम बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाएगा।

निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग

संघर्ष समिति ने सरकार से निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निजीकरण से बिजली की दरों में वृद्धि होगी और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, महाकुंभ जैसे आयोजनों में यह मॉडल विफल हो सकता है।

विद्युत कर्मियों का यह समर्पण महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता को और बढ़ाने के साथ-साथ निजीकरण के खिलाफ उनकी दृढ़ता को भी उजागर करता है।

 

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