Target Tv Live

बिजली वितरण निगमों के निजीकरण प्रस्ताव पर रोक लगाने की मांग, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

बिजली वितरण निगमों के निजीकरण प्रस्ताव पर रोक लगाने की मांग, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

LUCKNOW.  विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि प्रदेश के बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी न दी जाए। समिति ने कहा है कि इन प्रस्तावों से ऊर्जा निगमों के कार्य माहौल में अनावश्यक तनाव पैदा हो रहा है।

संघर्ष समिति ने बताया कि दिसंबर 2024 में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव एनर्जी टास्क फोर्स को भेजा था। यह प्रस्ताव तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से सरकार ने अस्वीकार कर दिया था। अब दोबारा इसे एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

महाकुंभ में व्यस्त कर्मियों के बीच आक्रोश
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान बिजली कर्मी प्रदेश में बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में निजीकरण के प्रस्तावों से बिजली कर्मियों में आक्रोश बढ़ रहा है और ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का माहौल बन रहा है।

योगी सरकार में बिजली व्यवस्था में सुधार
समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार हुआ है। बिजली कर्मियों ने एटी एंड सी (AT&C) हानियों को राष्ट्रीय मानक 15 प्रतिशत के नीचे लाने का लक्ष्य रखा है। आरडीएसएस (RDSS) स्कीम के तहत हजारों करोड़ रुपये की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया जा रहा है। ऐसे में इसे निजी कंपनियों को सौंपना प्रदेश के हित में नहीं है।

निजीकरण के प्रयोगों की समीक्षा की जरूरत
समिति ने आगरा और ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण के निजीकरण के असफल प्रयोग का उल्लेख किया। देश के अन्य हिस्सों में भी निजीकरण के करार रद्द किए जा चुके हैं। समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निजीकरण का कोई भी कदम उठाने से पहले पिछले प्रयोगों की विस्तृत समीक्षा और उपभोक्ताओं, किसानों व बिजली कर्मियों से व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।

बिजली पंचायतों का आयोजन जारी रहेगा
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नुकसान से आम उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों को अवगत कराने के लिए बिजली पंचायतों का आयोजन जारी रहेगा।

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से निजीकरण के इस प्रस्ताव पर रोक लगाने और प्रदेश के बिजली कर्मचारियों व उपभोक्ताओं के हित में हस्तक्षेप की अपील की है।

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें