Bijnor: किसान आंदोलन का ‘डबल धमाका’! गन्ने के ‘सुख’ से लेकर ‘वोटर लिस्ट’ तक कलेक्ट्रेट में गर्जे भाकियू कार्यकर्ता, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
बिजनौर | 10 अक्टूबर | डिजिटल विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (TargetTvLive)
बिजनौर। पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ने का सीजन शुरू होते ही किसान राजनीति एक बार फिर उफान पर है। शनिवार को बिजनौर की सड़कों पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का दबदबा और आक्रामकता साफ देखने को मिली। राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त आह्वान पर जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान की अगुवाई में दर्जनों पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहले गन्ना समिति बिजनौर में गोलबंद हुए और फिर वहाँ से हुंकार भरते हुए सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर को दो अलग-अलग मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि किसानों ने केवल खेतों और मिलों से जुड़े मुद्दे ही नहीं उठाए, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में ‘वोटर कार्ड’ की सेंधमारी को लेकर सीधे महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वार तक दस्तक दी है।
1. स्थानीय मोर्चा: चीनी मिलों की घटतौली और गन्ने की ‘सुख’ पर बड़ा वार
उपजिलाधिकारी को सौंपे गए पहले स्थानीय ज्ञापन में भाकियू ने जिले के किसान हित से जुड़े तीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रशासनिक लगाम लगाने की मांग की:
- धान खरीद केंद्र चालू करने की मांग: धान कटाई का सीजन चरम पर है, लेकिन जिले में धान क्रय केंद्रों की सुस्ती से किसान परेशान हैं। भाकियू ने मांग की कि जिले के सभी सरकारी धान क्रय केंद्रों को तुरंत और पूरी क्षमता के साथ चालू किया जाए।
- उचित दाम पर मिले मैली: शुगर मिलों से निकलने वाली मैली पर पहला हक स्थानीय किसानों का है। इसे बाहरी बिचौलियों को बेचने के बजाय जनपद के किसानों को रियायती व उचित दरों पर मुहैया कराया जाए।
- गन्ने की ‘सुख’ (नमी) के नाम पर दोहरी लूट बंद हो: भाकियू ने आरोप लगाया कि क्रय केंद्र पर तौल के बाद गन्ना लगभग 24 घंटे में मिल तक पहुँचता है, जिससे गन्ने का वजन घटता है। इस ‘सुख’ की भरपाई किसान के माथे क्यों मढ़ी जाए? जब क्रय केंद्र पहले ही 2% अतिरिक्त गन्ना अलग से काट रहे हैं, तो किसानों से यह दोहरी वसूली और घटतौली हर हाल में रोकी जाए।
2. राष्ट्रीय मोर्चा: वोटर लिस्ट से नाम कटने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र, सीजेपी का समर्थन
दूसरा ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम भेजा गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और भाकियू का तर्क है कि लोकतंत्र का आधार हर नागरिक का मताधिकार है।
“यह ज्ञापन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, दलित, पिछड़े और आदिवासियों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा के लिए है।” — सुनील प्रधान, जिला अध्यक्ष (भाकियू)
राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के 8 प्रमुख बिंदु:
- स्वतंत्र जांच: विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए लाखों नामों की निष्पक्ष जांच हो।
- नामों की पुनर्बहाली: गलत तरीके से काटे गए पात्र मतदाताओं के नाम समयबद्ध सीमा में जोड़े जाएं।
- सार्वजनिक विवरण: जिला व विधानसभा वार हटाए गए नामों की सूची सार्वजनिक पारदर्शी प्रारूप में जारी हो।
- सुनवाई का मौका: प्रभावित किसानों और गरीबों को आपत्ति व अपील दर्ज करने का सीधा अधिकार मिले।
- वंचित वर्गों का संरक्षण: प्रशासनिक कागजातों या तकनीकी पेचों के कारण किसी ग्रामीण का वोट न कटे।
- अधिकारियों पर गाज: जानबूझकर अनियमितता करने वाले जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- शिकायत निवारण प्रणाली: ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत सुधार के लिए पारदर्शी समय-सीमा तय हो।
- निर्वाचन में जनविश्वास: संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में जनता का भरोसा बहाल किया जाए।
TargetTvLive ग्राउंड रिपोर्ट: कलेक्ट्रेट में ये दिग्गज रहे मौजूद
बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने और हुंकार भरने वालों में जिले के प्रमुख किसान नेताओं की मौजूदगी रही। इस दौरान जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान, मुकेश जंघाला, बाबूराम तोमर, कोमन सिंह, गजेंद्र सिंह, मुनेंद्र काकरान, अजय बालियान, नरदेव सिंह, संदीप त्यागी, आशु चौधरी, डॉ. विजय, अरुण कुमार, नीटू चौधरी, रजनीश अहलावत, कवराज सिंह, चंद्रपाल सिंह, आदिल, रवि शेखर तोमर, मोनू प्रधान, अंकित, गौरव जंघाला, उबैद याकूब, विनीत चौधरी, अंकुर चौधरी, वीरेंद्र सिंह, मुकल शेरावत, पुष्पेंद्र सिंह, पंकज शेरावत, अशोक कुमार, गुलशन एवं सौरभ सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
TargetTvLive का विश्लेषण: क्यों अहम है भाकियू का यह कदम?
अवनीश त्यागी का टेक: आमतौर पर किसान यूनियनें केवल बिजली, कर्ज और गन्ने के दामों तक सीमित मानी जाती रही हैं। लेकिन बिजनौर में भाकियू का यह प्रदर्शन एक नए दौर की ओर इशारा करता है। एक तरफ जहां मिलों की मनमानी और गन्ने में 2% की कटौती जैसे ज़मीनी मुद्दों को उठाकर किसानों को एकजुट किया गया, वहीं दूसरी तरफ वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को लेकर राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाकर यह संदेश दिया गया है कि ग्रामीण भारत अपने राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों के प्रति भी उतना ही सजग है। प्रशासन के लिए अब चुनौती यह होगी कि वह मिलों की घटतौली रोके और सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान की फसल को उचित दाम दिलाए।












