DM ने ली जनसुनवाई के साथ अधिकारियों की लीगल क्लास
बिजनौर डीएम कार्यालय से ग्राउंड रिपोर्ट
विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive बिजनौर, 10 अक्टूबर 2026
बिजनौर। जनपद में जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के सख्त अनुपालन को लेकर जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह की कार्यशैली लगातार चर्चा में है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कलेक्ट्रेट स्थित जनसुनवाई की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए टारगेट टीवी लाइव (TargetTvLive) की टीम ने जिलाधिकारी कार्यालय का सूक्ष्म अवलोकन किया।
कार्यालय में डिजिटल तकनीक के माध्यम से जिले के समस्त उपजिलाधिकारी (SDM) वर्चुअल माध्यम से जुड़े हुए थे। जनसुनवाई के दौरान न केवल फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जा रहा था, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में विधिक नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारी अपने अधीनस्थ अधिकारियों का मार्गदर्शन भी कर रहे थे।
1. विधिक प्रक्रियाओं का पाठ: जब डीएम ने मंगवाईं कानून की पुस्तकें
जनसुनवाई के दौरान एक मामला ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत विभाग द्वारा पुलिस व पीएसी बल की मौजूदगी में बिजली मीटर लगाने का सामने आया। ग्रामीणों द्वारा इस प्रक्रिया पर असंतोष व्यक्त किए जाने के संदर्भ में जिलाधिकारी ने संबंधित उपजिलाधिकारी से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
उपजिलाधिकारी द्वारा प्रशासनिक स्तर पर पूर्व सूचना या लिखित अनुमति न होने की जानकारी दिए जाने पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी विभागीय कार्रवाई में विधिक प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। उन्होंने मौके पर कानून की पुस्तकें मंगवाकर स्क्रीन के माध्यम से संबंधित धाराओं का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्युत तथा पुलिस विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जनसुनवाई के साथ-साथ मातहत अधिकारियों को नियमों की तकनीकी जानकारी देना प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने वाला कदम दिखा।
2. भू-माफियाओं पर कड़ा रुख और राजनीतिक दबाव से दूरी
एक अन्य मामले में भूमि विवाद से जुड़ी शिकायत लेकर पहुँची महिला तथा उसके विपक्षी के तर्कों का जिलाधिकारी ने गहनता से परीक्षण किया। विपक्षी व्यक्ति द्वारा खुद को एक जनप्रतिनिधि का व्यक्तिगत प्रतिनिधि बताकर पक्ष रखने का प्रयास किया गया।
तथ्यों की समीक्षा के उपरांत मामले में अनियमितता पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित एसडीएम को दोनों पक्षों के विरुद्ध विधि सम्मत दंडात्मक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए। इस दौरान किसी भी प्रकार के बाह्य या राजनीतिक सिफारिशी हस्तक्षेप को दरकिनार करते हुए केवल गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया गया, जो निष्पक्ष प्रशासनिक प्रणाली का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
3. आपूर्ति विभाग की शिथिलता पर नाराजगी, DSO पर कार्रवाई के निर्देश
शहर में पीएनजी (PNG) गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों, एआरओ तथा प्रभावित उपभोक्ताओं की उपस्थिति में रसोई गैस कनेक्शन निष्क्रिय (Deactivate) किए जाने का मामला भी पटल पर आया। बिना किसी पूर्व सूचना अथवा चेतावनी के एलपीजी कनेक्शन बंद किए जाने की बात सामने आने पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने एआरओ को स्पष्ट हिदायत देते हुए उत्तरदायी पाए जाने पर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी का मंतव्य स्पष्ट था कि आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने से पूर्व निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन होना ही चाहिए।
4. “जिस अधिकारी का जो काम, विधि-सम्मत रूप से स्वयं करे पूरा”
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सिद्धांत पर जोर देते हुए मातहत अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जिस अधिकारी की जो विभागीय जिम्मेदारी और कार्य निर्धारित हैं, विधि-सम्मत रूप से उस कार्य का निष्पादन स्वयं उनके द्वारा ही किया जाना सुनिश्चित किया जाए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से न बचें और न ही मातहतों या अन्य एजेंसियों के भरोसे काम छोड़ें। हर अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र और दायित्वों की पूरी जानकारी होनी चाहिए और काम में किसी भी प्रकार का शॉर्टकट या विधिक अनभिज्ञता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
5. 10 से 12 बजे तक अनिवार्य जनसुनवाई के निर्देश
जनसामान्य की सुलभता को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी द्वारा जनपद के समस्त जिलास्तरीय अधिकारियों को पूर्व में दिए गए निर्देशों को पुनः रेखांकित किया गया। आदेशानुसार, प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सभी अधिकारियों को अपने कार्यालयों में उपस्थित रहकर अनिवार्य रूप से जनता की समस्याएं सुननी होंगी। इस समयावधि के दौरान अन्य बैठकों या कार्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी।
प्रशासनिक विश्लेषण: सुशासन और कानून के प्रति निष्ठा
बिजनौर कलेक्ट्रेट का यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि एक सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए केवल निर्णयों का त्वरित होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका कानूनी रूप से न्यायसंगत और पारदर्शी होना भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारियों को स्वयं दायित्व निभाने का निर्देश देने और जनसुनवाई के साथ विधिक प्रावधानों से अवगत कराने का यह कदम पूरे जिले के प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही और कार्यकुशलता को नई दिशा दे रहा है।
रिपोर्टिंग व संपादन: अवनीश त्यागी स्रोत: बिजनौर कलेक्ट्रेट (आँखों-देखी रिपोर्ट)












