धमाका: बिजनौर में शिक्षकों के समायोजन में ‘बड़ा खेल’! बाबू ने दबाई लिस्ट, बंद कमरों में गुपचुप ट्रांसफर से भड़का आक्रोश
डिजिटल डेस्क, TargetTvLive (विशेष कवरेज: अवनीश त्यागी) उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में पारदर्शी व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के समायोजन में बड़े स्तर पर ‘गोलमाल’ का पर्दाफाश हुआ है। प्राथमिक शिक्षक संघ ने सीधे तौर पर समायोजन प्रक्रिया में भारी धांधली, प्रशासनिक तानाशाही और नियमों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिले भर के आक्रोशित शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए बीएसए दफ्तर पर धावा बोल दिया है और इस पूरी फर्जीवाड़ा-युक्त प्रक्रिया को तुरंत निरस्त करने की मांग उठाई है।
सूत्रों का बड़ा खुलासा: ‘बाबू’ का खेल और दबाई गई ट्रांसफर लिस्ट
मामले में TargetTvLive को मिले पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा खेल विभाग के ही संबंधित पटल सहायक (बाबू) की शह पर रचा गया है। आरोप हैं कि बाबू ने सोची-समझी साजिश के तहत समायोजन सूची को कभी सार्वजनिक ही नहीं होने दिया। पर्दे के पीछे ‘गुपचुप’ तरीके से पसंदीदा और चहेते शिक्षकों के समायोजन के आदेश जारी कर दिए गए।
शिक्षकों और संगठनों के लगातार कड़े विरोध के बावजूद आज तक समायोजन सूची का सार्वजनिक न होना अपने आप में भ्रष्टाचार, लेन-देन और भाई-भतीजावाद की बदबूदार दास्तान बयां कर रहा है।
‘अवैध वसूली और उत्पीड़न का अड्डा बना BSA दफ्तर’: संघ का सीधा प्रहार
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार चौहान की अध्यक्षता में हुई एक आपातकालीन बैठक में समायोजन के नाम पर हो रही मनमानी पर कड़ा प्रहार किया गया। बैठक में शिक्षकों ने साफ शब्दों में विभागीय अनियमितताओं की पोल खोली:
- गोपनीयता का फर्जीवाड़ा: समायोजन जैसी पारदर्शी प्रक्रिया को पूरी तरह गुप्त रखकर सूचियों को दबा दिया गया।
- पदनाम तक गायब: जारी किए गए एकल आदेशों में शिक्षक का मूल पदनाम तक दर्ज नहीं किया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
- बिना नियम बेदखली: नियमों को दरकिनार कर कई शिक्षकों को अनावश्यक रूप से इधर से उधर फेंक दिया गया है।
संघ अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार चौहान ने दहाड़ते हुए कहा— “जिले में किसी भी शिक्षक का मानसिक, आर्थिक या प्रशासनिक उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वहीं, जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने अधिकारियों की पोल खोलते हुए कहा कि बीएसए दफ्तर के करिंदे शिक्षकों को फोन करके मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर तैयार की गई इस ‘दागी’ सूची को तुरंत कचरे के डिब्बे में डाला जाना चाहिए।
BSA सचिन कुमार कसाना को घेरा, निरस्त करने का अल्टीमेटम
गुस्साए शिक्षकों का एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार कसाना से मिला। संघ के पदाधिकारियों ने गड़बड़ी के तमाम साक्ष्य बीएसए की मेज पर रखते हुए इस धांधली में शामिल बाबुओं और अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और समायोजन निरस्त करने की मांग की।
घिरे हुए बीएसए सचिन कुमार कसाना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार शिक्षकों की आपत्तियों का निस्तारण करने का आश्वासन दिया है।
दूसरी तरफ प्रोन्नत वेतनमान पर भी गरमाया माहौल
बीएसए दफ्तर में जहां एक तरफ समायोजन के खिलाफ बवंडर खड़ा था, वहीं ‘जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ’ ने भी जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार यादव की अगुवाई में अपनी मांगों का मोर्चा खोल दिया। जिला मंत्री राहुल कुमार राठी के संचालन में हुई इस बैठक में पात्र शिक्षकों को अविलंब ‘प्रोन्नत वेतनमान’ का लाभ देने की पुरजोर मांग उठाई गई।
बैठक में डटे रहे ये प्रमुख रणनीतिकार: इस महामंथन में जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी, मुनीष कुमार चौहान, नितिन चौहान, चौधरी कुलदीप सिंह, नवनीत कुमार, अमित कुमार, मुदस्सर नजर, मीडिया प्रभारी मोहम्मद जावेद, ब्लॉक मंत्री अरुण कुमार और विवेक कुमार समेत बड़ी संख्या में शिक्षक नेता मौजूद रहे।
TargetTvLive का तीखा विश्लेषण: सरकारी व्यवस्थाओं में ‘बाबूगिरी’ का यह रवैया नया नहीं है, लेकिन जब बात शिक्षकों के भविष्य और प्राथमिक शिक्षा के ढांचे की हो, तो यह चुप्पी अपराध जैसी है। आखिर किसके इशारे पर समायोजन सूची को छिपाया गया? अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो सूची सार्वजनिक करने में विभाग के हाथ क्यों कांप रहे हैं? बीएसए का आश्वासन केवल खानापूर्ति बनकर रह जाता है या भ्रष्ट तंत्र पर चाबुक चलता है, TargetTvLive की नजर इस खबर पर लगातार बनी रहेगी।












