बिजनौर कलेक्ट्रेट अब ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’: ASP-भीम आर्मी आंदोलन के बाद DM उमेश प्रताप सिंह का बड़ा फैसला
पूर्व DM अंकित अग्रवाल को भी खींचने पड़े थे कदम
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर (24 सितंबर)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और आंदोलनों के केंद्र बिजनौर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ आ गया है। नवागत जिला मजिस्ट्रेट उमेश प्रताप सिंह ने बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में होने वाले लगातार धरनों और अव्यवस्था पर लगाम कसते हुए इसे पूरी तरह ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’ (निषिद्ध क्षेत्र) घोषित कर दिया है।
प्रशासन के नए फरमान के तहत अब कलेक्ट्रेट या जनपद मुख्यालय के किसी भी सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करना गैर-कानूनी होगा। किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन के लिए केवल ‘इंदिरा बाल भवन, बिजनौर’ को ही एकमात्र अधिकृत स्थल तय किया गया है, जहाँ भी पूर्व अनुमति के बाद ही धरना दिया जा सकेगा।
भीम आर्मी और ASP आंदोलन के तुरंत बाद प्रशासनिक एक्शन
प्रशासन की इस कड़ाई के पीछे तात्कालिक कारण कलेक्ट्रेट परिसर में पल-पल बिगड़ते हालात हैं। कलेक्ट्रेट में आजाद समाज पार्टी (ASP) और भीम आर्मी का बड़ा आंदोलन व शक्ति-प्रदर्शन जारी था। लाउडस्पीकरों की गूंज, समर्थकों की भारी भीड़ और नारेबाजी के कारण न्यायालयों व सरकारी दफ्तरों का कामकाज ठप हो गया था। दूर-दराज से आए आम फरियादियों को हो रही भारी असुविधा को देखते हुए डीएम उमेश प्रताप सिंह ने कार्यभार संभालते ही यह कड़ा आदेश जारी किया।
इतिहास का सबक: पूर्व DM अंकित अग्रवाल को भी खींचने पड़े थे कदम
बिजनौर कलेक्ट्रेट को आंदोलनों से मुक्त कराने का प्रयास नया नहीं है। इससे पूर्व तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल ने भी कलेक्ट्रेट परिसर को नो-प्रोटेस्ट ज़ोन बनाने के लिए ऐसा ही आदेश जारी किया था।
हालांकि, भारतीय किसान यूनियन और प्रमुख आंदोलनात्मक संगठनों के कड़े रुख के सामने प्रशासन का यह फैसला ज्यादा दिन टिक नहीं सका। किसान नेताओं का सीधा तर्क था कि “अधिकारी जहां बैठेंगे, धरना और प्रदर्शन भी वहीं होगा।” इस लामबंदी के आगे तत्कालीन प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे और कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरने और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का डेरा फिर से शुरू हो गया था।
विश्लेषणात्मक नज़रिया: क्यों कलेक्ट्रेट में ज़ीरो टॉलरेंस है अनिवार्य?
कलेक्ट्रेट केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि न्याय का प्रमुख स्थल है। यहाँ:
- महत्वपूर्ण न्यायालय: डीएम, एडीएम (प्रशासन, वित्त/राजस्व, न्यायिक), एसडीएम, उपभोक्ता फोरम और चकबंदी न्यायालय स्थित हैं।
- अति-संवेदनशील कार्य: ईवीएम (EVM) भंडारण, स्ट्रांग रूम और निर्वाचन संबंधी गोपनीय कार्य निष्पादित होते हैं।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट के नज़ीरों (अमित साहनी बनाम स्टेट ऑफ दिल्ली एवं माकपा बनाम भारत संघ) का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया गया है कि मौलिक अधिकारों के नाम पर कलेक्ट्रेट या सार्वजनिक परिसरों को अनिश्चितकाल के लिए बंधक बनाकर सामान्य जनजीवन या न्यायिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता।
TargetTvLive निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश गृह विभाग के 17 मई 2018 के आदेश के तहत इंदिरा बाल भवन को पहले भी चिह्नित किया गया था। अब देखना यह होगा कि क्या डीएम उमेश प्रताप सिंह अपने इस आदेश को धरातल पर कड़ाई से लागू करा पाते हैं, या फिर किसान यूनियनों, भीम आर्मी और ASP के संभावित कड़े रुख के बाद बिजनौर में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच शक्ति-परीक्षण का नया दौर देखने को मिलेगा।
TargetTvLive के लिए बिजनौर से अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।












