18 साल का शोषण, अब आर-पार का रण! UP के मनरेगा तकनीकी सहायकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
28 सितंबर से लखनऊ इको गार्डन में महाआंदोलन का अल्टीमेटम
5 सालों से नहीं बढ़ा एक भी रुपया, ₹6,000 तो हर महीने जेब से हो रहे स्वाहा! जूनियर इंजीनियर (JE) के बराबर ₹45,000 वेतनमान की मांग को लेकर बिजनौर से उठी बगावत की चिंगारी।
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विशेष एक्सक्लूसिव कवरेज: अवनीश त्यागी
बिजनौर (targetTvLive ): उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और मनरेगा की बुनियादी संरचना को जमीनी स्तर पर सींचने वाले तकनीकी सहायकों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। पिछले 18 वर्षों से भीषण विषमताओं और नाममात्र के मानदेय में पसीना बहा रहे इन कर्मचारियों ने अब शासन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। मनरेगा तकनीकी सहायक एसोसिएशन उ०प्र० (शाखा बिजनौर) ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी बिजनौर को अल्टीमेटम सौंपते हुए दो टूक कह दिया है—यदि 26 सितंबर तक मांगों पर फैसला नहीं हुआ, तो 28 सितंबर से पूरी प्रदेश कार्यकारिणी और हजारों तकनीकी सहायक राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में डेरा डालेंगे।
ग्राउंड रियलिटी: विकास का ढांचा गढ़ने वालों की जेबें खाली, फील्ड का खर्च ही निगल रहा आधा वेतन!
targetTvLive की विशेष पड़ताल में तकनीकी सहायकों का दर्द छलक पड़ा। ग्राम पंचायतों में लाखों-करोड़ों की परियोजनाओं के प्राक्कलन (Estimation) तैयार करने से लेकर निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने (Supervision) तक की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं तकनीकी सहायकों पर होती है। लेकिन विडंबना देखिए कि बीते 5 वर्षों में जहां कमरतोड़ महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया, वहीं इनके मानदेय में एक रुपये का भी इजाफा नहीं हुआ।
फील्ड ड्यूटी के कारण रोजाना दूर-दराज की ग्राम पंचायतों में दौड़-धूप करनी पड़ती है। कर्मचारियों का कहना है कि औसतन ₹6,000 प्रति माह तो केवल उनके दोपहिया वाहन के पेट्रोल और रखरखाव में ही स्वाहा हो जाते हैं। बचे हुए नाममात्र के पैसों से बच्चों की फीस, दवाइयां और परिवार का भरण-पोषण करना एक दुस्वप्न बन गया है।
मनरेगा तकनीकी सहायक एसोसिएशन की 3 मुख्य मांगें:
- जूनियर इंजीनियर (JE) के समान वेतन: योग्यता और कार्यभार के अनुरूप तकनीकी सहायकों को जूनियर इंजीनियर के मूल वेतन ₹45,000/- प्रति माह का मानदेय तत्काल दिया जाए।
- महंगाई व यात्रा भत्ता (TA/DA): फील्ड विजिट के भारी-भरकम खर्चों को देखते हुए न्यायसंगत यात्रा व महंगाई भत्ता सुनिश्चित किया जाए।
- स्थायीकरण व सेवा सुरक्षा: 18 वर्षों के लंबे अनुभव को सम्मान देते हुए संविदा के असुरक्षित चक्रव्यूह से मुक्ति और सेवा सुरक्षा नीति लागू की जाए।
26 सितंबर की डेडलाइन: क्या ठप होगा उत्तर प्रदेश के गांवों में विकास का पहिया?
बिजनौर जिलाध्यक्ष इं० भूपेन्द्र सिंह, जिला महामंत्री इं० सुशील कुमार, जिला कोषाध्यक्ष इं० पुरुषोत्तम कुमार और जिला उपाध्यक्ष इं० मौ० साजिद के नेतृत्व में जारी साझा बयान ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
अल्टीमेटम का सीधा संदेश: “हम अब आंसुओं से नहीं, अपने हक की लड़ाई से बात करेंगे। यदि 26 सितंबर 2026 तक सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो 28 सितंबर से बिजनौर समेत पूरे उत्तर प्रदेश का तकनीकी सहायक काम ठप कर लखनऊ इको गार्डन में अनिश्चितकालीन महाआंदोलन करेगा।”
ज्ञापन पर रंजीत सिंह, प्रमोद कुमार, सरवर नदीम समेत दर्जनों अभियंताओं के हस्ताक्षर दर्ज हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ.प्र. और हिन्द मजदूर सभा से सम्बद्ध इस शक्ति-प्रदर्शन से साफ है कि यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं।
targetTvLive का संपादकीय विश्लेषण (Editorial Stand):
तकनीकी सहायक केवल संविदा कर्मी नहीं, बल्कि पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं। ₹6,000 पेट्रोल खर्च कर अल्प मानदेय में जीवन व्यतीत करना किसी मानसिक उत्पीड़न से कम नहीं है। सरकार को चुनावी समर और प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए अविलंब सम्मानजनक समाधान निकालना होगा।
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