“बाहर टीन की दीवार, अंदर पेड़ों की कटान! SDM ने भागकर, जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी”
विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी। Target TV Live
धनौरा/बछरायूं। बाहर से ऊंची टीन की चादरों की दीवार… अंदर हरे-भरे आम के पेड़ों पर चलती कटर मशीनें… और जैसे ही प्रशासन की दस्तक हुई, अचानक मच गई भगदड़। बछरायूं के गजरौला रोड पर सामने आया यह घटनाक्रम अब गंभीर सवालों के घेरे में है। प्रशासन को मिली सूचना पर एसडीएम शैलेश कुमार दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो कथित पेड़ कटान का मामला सामने आया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी और कटी लकड़ी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को हटाने का प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई।
टीन की दीवार क्यों खड़ी की गई थी?
मामले की कहानी का सबसे अहम सिरा उस ऊंची टीन की घेराबंदी से जुड़ा है, जिसने कथित कटान वाले हिस्से को बाहर से लगभग पूरी तरह ओझल कर दिया था।
आरोप है कि इसी टीन की आड़ में आम के हरे-भरे फलदार पेड़ों को काटा जा रहा था। बाहर से गतिविधियां दिखाई न देने के कारण लंबे समय तक किसी को इसकी भनक नहीं लगी।
लेकिन प्रशासन को मिली सूचना ने इस कथित गोपनीय गतिविधि की परत खोल दी।
गुप्त सूचना मिली और सीधे मौके पर पहुंच गए एसडीएम
सूचना मिलते ही एसडीएम शैलेश कुमार दुबे ने मामले को गंभीरता से लिया और प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।
प्रशासनिक टीम के अचानक पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। मौके पर कटे हुए पेड़, लकड़ी और मशीनरी होने की जानकारी सामने आई।
यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया।
अधिकारी पहुंचे तो जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली हटाने की कोशिश!
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान जेसीबी और कटी लकड़ी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को वहां से हटाने का प्रयास किए जाने का आरोप है।
लेकिन प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई करते हुए वाहनों को पकड़ लिया।
घटनाक्रम का यह हिस्सा अब जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। सवाल यह है कि यदि मौके पर सब कुछ नियमानुसार था तो कार्रवाई के दौरान वाहनों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि लकड़ी वैध रूप से काटी गई थी तो उससे संबंधित अनुमति और दस्तावेज मौके पर क्यों नहीं दिखाए गए?
इन सवालों का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
हरे आम के पेड़ों की कटान—किसके आदेश पर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल पेड़ों की कटान की वैधता का है।
जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि—
क्या पेड़ों की कटान की अनुमति ली गई थी?
कितने पेड़ों की कटान हुई?
पेड़ किस भूमि पर खड़े थे?
भूमि और पेड़ों का स्वामित्व किसका है?
कटे पेड़ों की लकड़ी कहां ले जाई जानी थी?
यदि जांच में बिना अनुमति हरे फलदार पेड़ों की कटान की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठेगा।
फैक्ट्री के पीछे का स्थान भी बना जांच का अहम बिंदु
कथित कटान का स्थान एक फैक्ट्री के पीछे बताया जा रहा है। इसलिए जांच का दायरा केवल मौके पर मौजूद मजदूरों या मशीन ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
भूमि के अभिलेख, पेड़ों के स्वामित्व, फैक्ट्री प्रबंधन की जानकारी, मशीनों के उपयोग, लकड़ी के परिवहन और कटान से जुड़े दस्तावेजों की जांच से ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ होगी।
‘दबाव’ की चर्चा भी, लेकिन पुष्टि जांच से होगी
मामले को लेकर यह दावा भी किया जा रहा है कि संबंधित फैक्ट्री को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कुछ बड़े नेताओं का समर्थन प्राप्त है और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनाया जा रहा था।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं हुई है। इसलिए इसे जांच का विषय माना जाना चाहिए, निष्कर्ष नहीं।
यदि किसी अधिकारी पर दबाव बनाए जाने के प्रमाण मिलते हैं तो यह भी गंभीर प्रशासनिक प्रश्न होगा। वहीं यदि ऐसा कोई दबाव नहीं पाया जाता है तो तथ्य सामने आना भी उतना ही आवश्यक है।
एक टीन की दीवार ने खड़े कर दिए कई सवाल
बछरायूं का यह मामला अब केवल पेड़ों की कटान तक सीमित नहीं रह गया है। टीन की घेराबंदी से लेकर मौके पर मिली लकड़ी, कटर मशीन, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक—हर कड़ी की जांच जरूरी है।
क्योंकि असली सवाल यह नहीं है कि मौके पर कितनी लकड़ी मिली।
असली सवाल यह है कि टीन की उस दीवार के पीछे आखिर कब से क्या चल रहा था?
क्या पेड़ों की कटान के लिए अनुमति ली गई थी? यदि नहीं, तो जिम्मेदार कौन है? और यदि अनुमति थी, तो उसकी शर्तें क्या थीं?
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
एसडीएम द्वारा मौके से संबंधित सामग्री और वाहनों पर कार्रवाई किए जाने के बाद मामले की जांच महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। अब वन विभाग और पुलिस की जांच यह तय करेगी कि कथित कटान में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
बछरायूं में टीन की ऊंची दीवार ने जिस गतिविधि को नजरों से छिपाया, प्रशासन की कार्रवाई ने उसी पर सवालों की रोशनी डाल दी है। अब जांच की रिपोर्ट बताएगी कि इस ‘टीन की दीवार’ के पीछे की असली कहानी क्या थी।
विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी
Target TV Live डेस्क












