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UP Police फिर विवादों में: मेरठ में डेयरी व्यापारी से मांगी ₹6,000 की घूस, एडवोकेट बेटे के आते ही उड़े पुलिस के होश!

खाकी का ‘वसूली’ कांड! मेरठ में रात 1:30 बजे किसान-व्यापारी से ‘थाने के खर्चे’ की मांग

 ग्राउंड रिपोर्ट: सुरेंद्र शर्मा | targetTvLive मेरठ (उत्तर प्रदेश)

हेडलाइट्स

  • खाकी पर घूसखोरी का गंभीर आरोप: भावनपुर थाने की गश्ती पुलिस पर ‘थाने के खर्चे’ के नाम पर ₹6,000 की अवैध उगाही का सनसनीखेज आरोप।
  • विरोध पर दबंगई: पैसा न देने पर पशु व्यापारी और उनके भाई को पीटा, जबरन पुलिस की गाड़ी में ठूंसकर ले जाने की कोशिश।
  • वकील-बीजेपी नेता की एंट्री से खलबली: मौके पर पहुंचे एडवोकेट पुत्र को देखते ही बदले पुलिसकर्मियों के सुर।
  • तकनीकी जांच की मांग: जीपीएस, सीसीटीवी और जीडी एंट्री से उठेगा वर्दी की काली करतूत से पर्दा।

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ाता एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। जनपद मेरठ के थाना भावनपुर क्षेत्र में आधी रात गश्त के नाम पर निकली पुलिस पर खुलेआम ‘थाने का खर्चा’ मांगने और इंकार करने पर आम नागरिकों के साथ बर्बरता व मारपीट करने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का संबंध सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से है, जिसके बाद इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

आधी रात की दास्तान: जानिए क्या हुआ उस काली रात?

targetTvLive के पास मौजूद आधिकारिक शिकायत पत्र के अनुसार, पूरी घटना 19 सितंबर 2026 की देर रात लगभग 01:30 बजे की है:

  1. हरियाणा से लाए थे डेयरी की भैंसें: ग्राम ज्ञानपुर (थाना भावनपुर) निवासी श्री देवेंद्र शर्मा (पुत्र श्री सतपाल शर्मा) गांव में ही भैंसों की डेयरी चलाते हैं। वह हरियाणा से 6 भैंसें खरीदकर अपने गांव ज्ञानपुर पहुंचे ही थे कि भावनपुर थाने की गश्ती गाड़ी वहां आ धमकी।
  2. ‘थाने का खर्चा दो, वरना…’: गश्ती टीम की कमान उपनिरीक्षक (SI) रोहित कुमार यादव के हाथों में थी, जिनके साथ 3 हेड कांस्टेबल और 1 कांस्टेबल मौजूद थे। पुलिसकर्मियों ने भैंसों के दस्तावेज और पूछताछ के नाम पर देवेंद्र शर्मा को घेरा और सीधे ₹6,000 की मांग रख दी।
  3. ‘थाने का खर्चा जाता है साहब!’: जब किसान-व्यापारी देवेंद्र शर्मा ने पूछा कि यह पैसा किस रसीद या नियम के तहत मांगा जा रहा है, तो पुलिसकर्मियों का टका सा जवाब था—“थाने का खर्चा जाता है, चुपचाप जमा करो!”
  4. सड़क पर गुंडागर्दी और मारपीट: जब पीड़ित ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी हदें पार करते हुए उनके साथ गाली-गलौज, हाथापाई और मारपीट शुरू कर दी तथा जबरन पुलिस गाड़ी में खींचने लगे।
  5. बचाने आए भाई को भी नहीं बख्शा: चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे पीड़ित के भाई श्री प्रवीन शर्मा ने जब पुलिस की इस गुंडागर्दी का विरोध किया, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा और दोनों भाइयों को जबरन पुलिस वाहन में ठूंस लिया।

‘ये तो वकील साहब के पिताजी हैं…!’ – और ठिठक गई पुलिस

घटना की जानकारी पीड़ित के छोटे बेटे ने तुरंत अपने बड़े भाई रोबिन शर्मा एडवोकेट को दी। रोबिन शर्मा (जो भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, मेरठ के सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं) बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचे।

बीजेपी नेता और एडवोकेट रोबिन शर्मा को देखते ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। वर्दीधारियों के सुर तुरंत बदल गए और वे कहने लगे—“ये तो वकील साहब के पिताजी हैं।” इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस प्रशासन के समक्ष इस पूरी अवैध वसूली और गुंडागर्दी की कलई खोलकर रख दी।

8 सूत्रीय शिकायती पत्र: इन सवालों के घेरे में भावनपुर पुलिस

पीड़ित पक्ष की ओर से थाना अध्यक्ष भावनपुर को सौंपे गए लिखित प्रार्थना-पत्र में 8 कड़े सवाल और मांगें उठाई गई हैं:

  • 1. उच्चस्तरीय जांच: पूरे घटनाक्रम की किसी निष्पक्ष एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • 2. SI रोहित यादव की भूमिका: उपनिरीक्षक रोहित कुमार यादव और उनकी पूरी गश्ती टीम की भूमिका की गहनता से पड़ताल हो।
  • 3. ‘वसूली’ का आधार क्या था?: पुलिस स्पष्ट करे कि देर रात 1:30 बजे किस कानून के तहत ₹6,000 के “थाने के खर्चे” की मांग की जा रही थी?
  • 4. डिजिटल व डिजिटल साक्ष्यों की सीजर: घटना के समय गश्ती पुलिस वाहन की GPS/मूवमेंट डिटेल, General Diary (GD) एंट्री और आसपास के CCTV फुटेज को तुरंत कब्जे में लेकर जांच का हिस्सा बनाया जाए।
  • 5. सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई: आरोप सिद्ध होने पर दोषी पुलिसकर्मियों पर न केवल विभागीय निलंबन हो, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
  • 6. प्रतिशोध की आशंका: पीड़ित परिवार ने आशंका जताई है कि शिकायत के बाद पुलिस फर्जी मुकदमे बनाकर उन्हें प्रताड़ित कर सकती है, अतः उन्हें सुरक्षा दी जाए।

targetTvLive का तीखा विश्लेषण: रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं!

अवनीश त्यागी की विशेष टिप्पणी:

“उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर भावनपुर जैसी घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा कलंक लगाती हैं। जब एक बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और एडवोकेट के परिवार को पुलिसिया धौंस और अवैध वसूली का सामना करना पड़ सकता है, तो जरा सोचिए… किसी आम, गरीब और असहाय नागरिक की रातों की नींद यह गश्ती पुलिस कैसे हराम करती होगी?”

क्या मेरठ पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले में केवल लीपापोती करेंगे या उपनिरीक्षक रोहित यादव और उनकी टीम पर सख्त नजीर पेश करने वाली कार्रवाई होगी? targetTvLive इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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