ATS डोल्से में बिजली संकट से फूटा गुस्सा: लाखों वसूलने के बाद भी अंधेरे में 1200 परिवार, लिफ्ट में फंसे लोग, रातभर हंगामा
“पावर बैकअप” के नाम पर करोड़ों की वसूली, लेकिन बिजली जाते ही जवाब दे गया सिस्टम; महिलाएं-बुजुर्ग सड़कों पर उतरे
रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान | TargetTvLive
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईप्रोफाइल मानी जाने वाली एटीएस डोल्से सोसायटी गुरुवार रात भारी बिजली संकट की वजह से उबाल पर आ गई। रात करीब 8 बजे शुरू हुई बिजली ट्रिपिंग ने देखते ही देखते पूरे परिसर को अफरा-तफरी में बदल दिया। भीषण गर्मी, बंद एसी, अंधेरे में डूबे टावर और बीच रास्ते में अटकती लिफ्टों ने लोगों का धैर्य तोड़ दिया।
सबसे ज्यादा डरावनी स्थिति तब बनी जब कई निवासी बार-बार बिजली जाने के कारण लिफ्टों में फंस गए। बच्चों की चीखें, बुजुर्गों की घबराहट और महिलाओं की बेचैनी ने पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। लोगों का आरोप है कि जिस “प्रीमियम लाइफ” का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये वसूले गए, आज वही सोसायटी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है।
एक-एक फ्लैट से लाखों लिए, फिर भी बैकअप फेल
रेज़िडेंट्स का कहना है कि फ्लैट रजिस्ट्री के समय बिल्डर ने “पावर बैकअप” के नाम पर प्रत्येक फ्लैट से करीब एक लाख रुपये अतिरिक्त वसूले थे। इतना ही नहीं, हर फ्लैट को न्यूनतम 5 किलोवाट बिजली कनेक्शन देने का दावा किया गया।
लेकिन हकीकत यह है कि बिजली कटते ही डीजी बैकअप पूरी तरह लड़खड़ा जाता है। लोगों का आरोप है कि डीजी की क्षमता इतनी कम है कि पूरा लोड संभाल ही नहीं पाता और बार-बार ट्रिपिंग शुरू हो जाती है।
हैरानी की बात यह भी है कि निवासियों से आज भी प्रीपेड मीटर के जरिए प्रतिदिन ₹20 फिक्स चार्ज और ₹10 डीजी चार्ज लगातार वसूले जा रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को न तो स्थिर बिजली मिल रही है और न ही भरोसेमंद बैकअप।
“फोन उठाना बंद कर दिया”, रेज़िडेंट्स का फूटा गुस्सा
जैसे-जैसे परेशानी बढ़ती गई, वैसे-वैसे लोगों का गुस्सा भी बढ़ता गया। निवासियों का आरोप है कि एटीएस के मेंटेनेंस मैनेजर बभीश कुमार ने लोगों के लगातार फोन आने पर कॉल उठाना ही बंद कर दिया। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
जब बड़ी संख्या में लोग कंट्रोल रूम पहुंचे तो वहां भी उन्हें केवल आश्वासन और बहाने सुनने को मिले। लोगों का आरोप है कि घंटों तक उन्हें वास्तविक स्थिति बताने के बजाय गुमराह किया जाता रहा।
ATS के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति से भी नहीं मिली मदद
समस्या का कोई समाधान न निकलता देख बड़ी संख्या में निवासी सोसायटी में रहने वाले ATS के कथित करीबी और पैरोकार बताए जा रहे डॉ. सुदर्शन कुमार के फ्लैट पहुंचे। लोगों को उम्मीद थी कि वह प्रबंधन तक उनकी बात पहुंचाएंगे और संकट की घड़ी में साथ देंगे।
लेकिन आरोप है कि उन्होंने दरवाजा तक नहीं खोला। अंदर से यह संदेश दिया गया कि वह मिलने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बाद लोगों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया।
महिलाएं और बुजुर्ग भी रात में पहुंचे पुलिस चौकी
रात करीब 9:30 बजे स्थिति इतनी बिगड़ गई कि महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में एकजुट होकर ACE Platinum पुलिस चौकी पहुंच गए। करीब 100 से अधिक लोगों ने पुलिस को पूरी स्थिति बताई।
चौकी इंचार्ज मुकुल यादव ने लोगों की शिकायत गंभीरता से सुनी और तुरंत बिल्डर के जीएम को फोन कर समस्या का समाधान कराने को कहा। पुलिस ने लोगों को कानूनी तरीके से शिकायत आगे बढ़ाने की सलाह भी दी।
“अब चुप नहीं बैठेंगे”, आंदोलन की चेतावनी
रेज़िडेंट्स का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई बार बिजली और बैकअप की समस्या सामने आ चुकी है, लेकिन हर बार केवल अस्थायी समाधान देकर मामला दबा दिया जाता है।
अब लोगों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। रेज़िडेंट्स ने चेतावनी दी है कि वे सामूहिक रूप से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, बिजली विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाएंगे।
हाईराइज सोसायटियों के दावों पर उठे बड़े सवाल
ATS डोल्से की घटना ने एक बार फिर हाईराइज सोसायटियों में बिल्डरों द्वारा किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये लेकर “लक्जरी सुविधाएं” देने का दावा करने वाली सोसायटियों में जब मूलभूत सुविधाएं ही ठप हो जाएं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जवाबदेही किसकी है?
भीषण गर्मी के बीच ATS डोल्से में गुजरी यह रात लोगों के लिए केवल बिजली संकट नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का प्रतीक बन गई।
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