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बिजनौर में ई-कॉमर्स कंपनियों को अल्टीमेटम, बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचे तो होगी कानूनी कार्रवाई

बिजनौर में ई-कॉमर्स कंपनियों को अल्टीमेटम, बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचे तो होगी कानूनी कार्रवाई

 

किसानों की जिंदगी से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा! ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रशासन की दो टूक चेतावनी
अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री अब प्रशासन की सख्त निगरानी में आ गई है। बिजनौर में बिना वैध लाइसेंस के इंटरनेट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कीटनाशकों का कारोबार करने वालों पर जिला प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि यदि कोई ई-कॉमर्स कंपनी, ऑनलाइन फर्म या विक्रेता बिना उचित लाइसेंस के कीटनाशकों का स्टॉक रखते या बिक्री करते पाया गया, तो उसके खिलाफ सीधे कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब गांवों और कस्बों तक ऑनलाइन खरीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और किसान भी मोबाइल एप व वेबसाइटों के जरिए कृषि दवाइयां मंगाने लगे हैं। लेकिन इसी बढ़ते डिजिटल कारोबार के बीच नकली, घटिया और बिना अनुमति वाले कीटनाशकों की बिक्री का खतरा भी बढ़ता जा रहा था।

सरकार की नजर अब ऑनलाइन बाजार पर

कृषि निदेशालय, कृषि रक्षा अनुभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ से जारी निर्देशों के बाद बिजनौर प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कीटनाशी नियमावली 1973 में संशोधन कर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए थे। अब इन्हीं नियमों को जमीन पर सख्ती से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

प्रशासन का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार ऐसे विक्रेता सक्रिय हो जाते हैं जिनके पास वैध लाइसेंस नहीं होता। किसान चमकदार विज्ञापनों और कम कीमत के लालच में उत्पाद खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई मामलों में नकली दवाओं के कारण पैदावार प्रभावित होने और मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं।

क्या कहा गया है आदेश में?

जारी निर्देशों के अनुसार अब कोई भी लाइसेंस धारक केवल वैध अनुमति के आधार पर ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कीटनाशकों की बिक्री कर सकेगा।

इसके अलावा ऑनलाइन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने वाले विक्रेता का लाइसेंस पूरी तरह वैध हो। इसके लिए संबंधित राज्य के लाइसेंसिंग अधिकारी से सत्यापन कराना अनिवार्य किया गया है।

यानी अब सिर्फ वेबसाइट बना लेने या ऑनलाइन स्टोर खोल लेने भर से कोई भी व्यक्ति कृषि दवाइयों का कारोबार नहीं कर सकेगा।

उपभोक्ता नियमों का पालन भी जरूरी

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों और लाइसेंस धारकों को उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 का पालन करना होगा।

इसका मतलब है कि ऑनलाइन बिक्री में पारदर्शिता रखनी होगी, उत्पाद की सही जानकारी देनी होगी और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली गतिविधियों से बचना होगा।

किसानों के हित में क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?

विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां सीधे फसल, मिट्टी और इंसानी स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। यदि नकली या गलत कीटनाशक किसानों तक पहुंचते हैं तो इससे केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान तकनीकी जानकारी के अभाव में ऑनलाइन दिख रहे हर उत्पाद पर भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई किसानों को सुरक्षित और प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

निरीक्षण अभियान की भी तैयारी

सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कृषि विभाग ऑनलाइन कारोबार से जुड़े विक्रेताओं और स्टॉक प्वाइंट्स की जांच भी तेज कर सकता है। यदि किसी फर्म के दस्तावेज अधूरे मिले या लाइसेंस संदिग्ध पाया गया तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का साफ संदेश है कि किसानों की मेहनत और फसलों के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डिजिटल खेती के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी

आज खेती भी तेजी से डिजिटल हो रही है। बीज से लेकर खाद और दवाइयों तक सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। लेकिन सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। यही वजह है कि अब सरकार ऑनलाइन कृषि बाजार को भी नियंत्रित और पारदर्शी बनाने में जुट गई है।

बिजनौर प्रशासन की यह सख्ती केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में ऑनलाइन कृषि कारोबार के लिए एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।

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