मौत के मुहाने पर गजरौला चौपला! फुटपाथों पर कब्जा, हाईवे पर अराजकता… हर पल हादसे का खतरा

अमरोहा में ‘अतिक्रमण राज’: नाले निगले, सड़कें सिकुड़ीं, प्रशासन खामोश… जनता बेहाल
By एम पी सिंह | TargetTvLive
अमरोहा जनपद में अतिक्रमण अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर मंडराता खुला खतरा बन चुका है। शहर से लेकर हाईवे और औद्योगिक क्षेत्रों तक सार्वजनिक जमीनों पर कब्जों का ऐसा जाल फैल गया है कि सड़कें सिकुड़ रही हैं, फुटपाथ गायब हो चुके हैं और हर सफर डर के साए में तय हो रहा है।
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जहां कभी राहगीरों के चलने की जगह थी, वहां अब दुकानों का सामान, ठेले, जेनरेटर और अवैध निर्माण दिखाई देते हैं। नाले-नालियां पाटकर उन पर भारी जेनरेटर रख दिए गए हैं, जबकि ग्रीन बेल्ट तक को निजी कब्जों में बदल दिया गया है। कहीं बैरिकेडिंग कर निजी बगीचे तैयार कर लिए गए हैं तो कहीं सरकारी जमीन को सुरक्षा कक्ष बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
गजरौला चौपला बना ‘खतरे का चौराहा’
गजरौला चौपला आज अतिक्रमण और ट्रैफिक अराजकता की सबसे भयावह तस्वीर बन चुका है। बदायूं-बिल्सी स्टेट हाईवे-51 और दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-09 को जोड़ने वाला यह अहम चौपला अब जाम, अवैध कब्जों और हादसों का केंद्र बन गया है।
दिल्ली की ओर जाने वाली जोया सर्विस रोड इतनी संकरी हो चुकी है कि यहां दो बड़े वाहन आमने-सामने आ जाएं तो लंबा जाम लगना तय माना जाता है। सड़क किनारे दुकानदारों द्वारा फुटपाथों पर अवैध रूप से फल और खान-पान के ठेले लगवा दिए गए हैं। नतीजा यह कि पैदल यात्रियों और रोडवेज यात्रियों के लिए खड़े होने तक की जगह नहीं बची।
रोडवेज यात्रियों की जान से खिलवाड़
औद्योगिक क्षेत्र गजरौला के अल्लीपुर चौपला से चांदपुर मार्ग तक हालात और भी खतरनाक हैं। रोडवेज बसों को रोकने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बचा है। बस चालक जैसे ही वाहन रोकने की कोशिश करते हैं, अवैध कब्जेदारों से विवाद शुरू हो जाता है। कई बार अभद्रता और मारपीट तक की नौबत आ चुकी है।
यात्री मजबूरी में सड़क के बीच उतरते हैं और तेज रफ्तार वाहनों के बीच जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां हर दिन कोई न कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।
ट्रांसफार्मर की आड़ में कब्जे, नालों पर जेनरेटर
मंडी धनौरा की शेरपुर चुंगी, चौधरी चरण सिंह पार्क, कलाली मार्ग और महादेव चुंगी समेत शहर के कई इलाकों में बिजली ट्रांसफार्मरों की आड़ में अवैध कब्जे किए गए हैं। नालों को पाटकर उन पर भारी जेनरेटर रख दिए गए हैं, जिससे जल निकासी व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा चुकी है।
बरसात के दौरान यही कब्जे जलभराव और दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
विकास के दावे बनाम जमीनी हकीकत
एक ओर सरकार विश्वस्तरीय सड़कें और स्मार्ट सिटी जैसे बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर अमरोहा की सच्चाई बदहाल व्यवस्था की पोल खोल रही है। टूटी सड़कें, जाम से जूझते चौराहे, चोक नाले और कब्जों से घिरे फुटपाथ प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सुरक्षित सफर के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक सुरक्षित नहीं छोड़ी गईं।
सवालों के घेरे में नगरपालिका और प्रशासन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका प्रशासन जानबूझकर अतिक्रमण हटाने से बच रहा है ताकि किसी वर्ग की नाराजगी न झेलनी पड़े। यही वजह है कि पुलिस और ट्रैफिक विभाग अकेले इस समस्या से जूझते नजर आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं चलाया गया तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा प्रशासनिक लापरवाही की सबसे बड़ी मिसाल बन सकता है।
जनता पूछ रही… आखिर कब जागेगा सिस्टम?
- फुटपाथों और ग्रीन बेल्ट पर कब्जों को संरक्षण कौन दे रहा है?
- हाईवे किनारे अवैध ठेले और निर्माण कब हटेंगे?
- नालों को पाटने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
- क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों ने मांग की है कि गजरौला चौपला, जोया सर्विस रोड, मंडी धनौरा और अमरोहा नगर के प्रमुख मार्गों पर तत्काल विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाए। फुटपाथों को कब्जामुक्त कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए और अवैध निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
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