सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: अब हर जिले में बनेगा डॉग नसबंदी सेंटर, राज्यों की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
“आवारा कुत्तों पर गोली नहीं, वैज्ञानिक नियंत्रण जरूरी” — सुप्रीम कोर्ट ने ABC Rules 2023 को दी मजबूत कानूनी ढाल
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
देशभर में बढ़ते स्ट्रीट डॉग हमलों, रेबीज के खतरे और आवारा कुत्तों को लेकर छिड़ी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने सरकारों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि समस्या का समाधान कुत्तों को हटाने या हिंसक कार्रवाई में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक नसबंदी, टीकाकरण और सुनियोजित प्रबंधन में है।
सुप्रीम कोर्ट ने Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 को पूरी तरह बरकरार रखते हुए सभी राज्यों और नगर निकायों को आदेश दिया है कि देश के हर जिले में कम से कम एक अत्याधुनिक एबीसी सेंटर स्थापित किया जाए। इतना ही नहीं, अदालत ने यह भी माना कि सरकारों की लापरवाही और नियमों के कमजोर क्रियान्वयन ने ही आज के संकट को जन्म दिया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “सरकारों की नाकामी से बिगड़े हालात”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्षों से एबीसी नियमों को गंभीरता से लागू नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि कई शहरों में स्ट्रीट डॉग की आबादी तेजी से बढ़ी और रेबीज का खतरा गहराता गया।
अब कोर्ट ने राज्यों को समयबद्ध तरीके से नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम लागू करने का निर्देश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी न्यायालय स्तर पर होगी, जिससे जिम्मेदार एजेंसियों पर जवाबदेही तय हो सके।
“यह इंसान और पशु दोनों की सुरक्षा का रास्ता”
फिल्म निर्माता और रेबीज मुक्त भारत अभियान की प्रमुख सदस्य अदिति आनंद ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह मानवीय और वैज्ञानिक सोच की जीत है।
उन्होंने कहा,
“अंधाधुंध पकड़ना, हटाना या मारना कभी समाधान नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नसबंदी, टीकाकरण और संगठित प्रबंधन ही भारत का वैधानिक और टिकाऊ रास्ता है।”
अदिति आनंद ने यह भी कहा कि अदालत ने मानव सुरक्षा और पशु कल्याण को दो अलग-अलग मुद्दे मानने की सोच को खारिज कर दिया है। अब दोनों के समाधान के लिए एक साझा और वैज्ञानिक नीति अपनानी होगी।
फैसले में छिपी चेतावनी भी अहम
हालांकि अदालत ने एबीसी नियम 2023 और एडब्ल्यूबीआई एसओपी को मजबूत कानूनी समर्थन दिया है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में राज्यों को हस्तक्षेप की छूट भी दी गई है।
यही वजह है कि पशु कल्याण संगठनों ने चेतावनी दी है कि कहीं स्थानीय प्रशासन इन आदेशों का गलत अर्थ निकालकर अंधाधुंध पकड़ने, अवैध शिफ्टिंग या मनमाने आश्रय गृहों में बंद करने जैसी कार्रवाई शुरू न कर दे।
संगठनों ने कहा कि हर कदम कानून, वैज्ञानिक प्रमाण और मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
देश के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया में रेबीज से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। हर साल हजारों लोग कुत्तों के काटने और संक्रमण का शिकार होते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल पशु अधिकार का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी प्रबंधन का बड़ा रोडमैप माना जा रहा है।
यदि राज्यों ने समय पर एबीसी सेंटर स्थापित कर व्यापक नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू किया, तो आने वाले वर्षों में स्ट्रीट डॉग संकट और रेबीज दोनों पर बड़ा नियंत्रण संभव है।
अब निगाहें सरकारों पर
सुप्रीम कोर्ट ने रास्ता साफ कर दिया है। अब असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकारें और नगर निकाय इस आदेश को गंभीरता से जमीन पर उतार पाएंगे या फिर यह फैसला भी फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाएगा।
देशभर के पशु कल्याण संगठन अब अदालत के आदेशों के पालन पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि भारत वैज्ञानिक और मानवीय समाधान की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर पुरानी अव्यवस्थित व्यवस्था में ही उलझा रहता है।
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