फसल में बीमारी और कीटों का खतरा बढ़ा, बिजनौर कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
“बीज बोने से पहले यह काम नहीं किया तो बीमारी और कीट खेत साफ कर देंगे” — बिजनौर कृषि विभाग की बड़ी एडवाइजरी
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। खरीफ फसलों की बुआई शुरू होते ही कृषि विभाग ने किसानों के लिए बड़ी चेतावनी जारी की है। विभाग का साफ कहना है कि अगर किसान बिना बीज शोधन और भूमि शोधन के सीधे बुआई करेंगे, तो फसल शुरुआत से ही रोग और कीटों की चपेट में आ सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन और किसान की जेब दोनों पर पड़ेगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में बीज डालने से पहले जैविक तरीके अपनाएं। विभाग ने खास तौर पर ट्राइकोडर्मा हरजेनियम और ब्यूवेरिया बेसियाना के इस्तेमाल पर जोर दिया है, जिन्हें फसल का “जैविक सुरक्षा कवच” बताया जा रहा है।
एक छोटी लापरवाही… और पूरी मेहनत बर्बाद!
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कई किसान अच्छी किस्म का बीज तो खरीद लेते हैं, लेकिन बीज उपचार को नजरअंदाज कर देते हैं। यही गलती बाद में जड़ सड़न, तना सड़न, झुलसा और उकठा जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बनती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ट्राइकोडर्मा बीज के चारों तरफ सुरक्षा परत बना देता है, जिससे हानिकारक फफूंद फसल पर हमला नहीं कर पाती। इससे बीज जल्दी और बेहतर अंकुरित होता है तथा पौधे मजबूत बनते हैं।
ट्राइकोडर्मा: खेत का “साइलेंट बॉडीगार्ड”
कृषि विभाग के अनुसार ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदनाशक है, जो खेत में मौजूद हानिकारक फफूंद को खत्म करने का काम करता है। यह बिना मिट्टी खराब किए फसल की सुरक्षा करता है।
ऐसे करें इस्तेमाल
बीज शोधन
5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो बीज में मिलाकर बुआई करें।
नर्सरी उपचार
5 ग्राम ट्राइकोडर्मा एक लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों को उपचारित करें।
भूमि शोधन
2.5 किलो ट्राइकोडर्मा को 75 से 100 किलो गोबर की खाद में मिलाकर 8 से 10 दिन छाया में रखें और आखिरी जुताई में खेत में मिला दें।
दीमक, सफेद गिडार और पत्ती खाने वाले कीटों पर भी वार
कृषि विभाग ने किसानों को ब्यूवेरिया बेसियाना के इस्तेमाल की भी सलाह दी है। यह जैविक कीटनाशक दीमक, सफेद गिडार, पत्ती लपेटक और चूसक कीटों पर असरदार माना जाता है।
विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि ब्यूवेरिया के प्रयोग से पहले या बाद में रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल न करें, वरना इसका असर खत्म हो सकता है।
बढ़ती दवा कीमतों के बीच किसानों को सस्ता समाधान
रासायनिक दवाओं की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान किसानों के लिए यह जैविक तरीका राहत बन सकता है। इससे न सिर्फ खर्च कम होगा बल्कि मिट्टी की ताकत भी बनी रहेगी और फसल सुरक्षित रहेगी।
कृषि विभाग की सीधी अपील
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि “जल्दबाजी में सिर्फ बीज न बोएं, पहले बीज और खेत को सुरक्षित बनाएं।” सही समय पर बीज शोधन और भूमि शोधन करने से रोग कम होंगे, उत्पादन बढ़ेगा और किसान का नुकसान भी रुकेगा।
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