3 साल पुराने वीडियो से मचा बवाल! कौशल विकास मिशन में अवैध वसूली के आरोपों पर हाईलेवल जांच

वायरल वीडियो, कर्मचारियों के आरोप और हाईलेवल जांच… आखिर कौशल विकास मिशन में चल क्या रहा था?
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive Special Report
बिजनौर।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, बिजनौर इन दिनों गंभीर आरोपों और प्रशासनिक हलचल के कारण सुर्खियों में है। विभाग के भीतर कथित अवैध वसूली, अधिकारियों के नाम पर धन मांगने और कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोपों ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब कौशल विकास मिशन में कार्यरत लोकेन्द्र कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह के समक्ष लिखित शिकायत देकर सनसनीखेज आरोप लगाए। शिकायत में दावा किया गया कि मिशन में कार्यरत एमआईएस मैनेजर रोहिताश पाण्डेय और मारकण्डेय चौरसिया कथित रूप से मुख्य विकास अधिकारी और जिला समन्वयक के नाम पर अवैध धनराशि की मांग और वसूली करते थे। शिकायतकर्ता ने मानसिक दबाव और उत्पीड़न की बात भी कही है।
इन आरोपों के सामने आने के बाद सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
3 साल पुराना वीडियो बना नई बहस का कारण
इस पूरे विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने। प्रशासन की ओर से यह कहा गया है कि वायरल वीडियो लगभग तीन वर्ष पुराना बताया जा रहा है, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि मामला पुराना था तो इतने समय तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सोशल मीडिया पर लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग के भीतर लंबे समय से कोई “अनौपचारिक वसूली तंत्र” सक्रिय था?
CDO ने बैठाई हाईलेवल जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने तत्काल त्रिस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति में —
- परियोजना निदेशक, डीआरडीए
- प्रधानाचार्य, पॉलीटेक्निक
- सहायक आयुक्त एवं जिला सहायक निबंधक, सहकारिता
को शामिल किया गया है।
समिति को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता सहित सभी पक्षों को सुनते हुए विस्तृत और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाए।
क्या सरकारी योजनाओं में भी चल रहा है ‘कट सिस्टम’?
यह मामला अब केवल एक विभागीय विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा। चर्चाएं इस बात को लेकर भी तेज हैं कि क्या सरकारी मिशनों और योजनाओं में कर्मचारियों पर कथित “ऊपर तक पहुंच” या “सेटिंग” के नाम पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है?
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई प्रशासनिक स्तरों तक जवाबदेही तय हो सकती है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी जनपद की नजरें
फिलहाल पूरे जनपद की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद था, अंदरूनी खींचतान का परिणाम था या फिर वास्तव में कौशल विकास मिशन के भीतर कोई बड़ा खेल चल रहा था।
यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हुई, तो यह मामला बिजनौर के सबसे चर्चित प्रशासनिक विवादों में शामिल हो सकता है।
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