स्वामी श्रद्धानंद का 170वां जन्मोत्सव: रॉलेट एक्ट के खिलाफ ललकार से लेकर गुरुकुल क्रांति तक, दिल्ली में गूंजा महान सन्यासी का संदेश
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नई दिल्ली। निर्भीक सन्यासी, महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रखर योद्धा स्वामी श्रद्धानंद का 170वां जन्मोत्सव राजधानी दिल्ली में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आर्य समाज दीवान हाल, स्वामी श्रद्धानंद स्मारक टाउन हॉल और विभिन्न आर्य संस्थाओं द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आर्य समाज के अनुयायियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
रॉलेट एक्ट के विरोध से राष्ट्रीय आंदोलन को मिली नई धार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री विनय आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद केवल धार्मिक नेता ही नहीं, बल्कि एक निर्भीक राष्ट्रनायक थे। उन्होंने रॉलेट एक्ट के खिलाफ चांदनी चौक में अंग्रेजों को खुली चुनौती दी और राष्ट्रीय आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।
उन्होंने यह भी बताया कि स्वामी श्रद्धानंद ने जामा मस्जिद के मंच से देश की एकता और भाईचारे का ऐतिहासिक संदेश देकर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की, जो आज भी प्रासंगिक है।
गुरुकुल शिक्षा, दलितोद्धार और नारी शिक्षा में ऐतिहासिक योगदान
आर्य केंद्रीय सभा, दिल्ली राज्य के महासचिव डॉ. मुकेश आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जीवन समाज सुधार के लिए समर्पित रहा। उन्होंने पूरे देश में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के प्रसार, दलितोद्धार और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों से समाज में शिक्षा और समानता की नई चेतना का संचार हुआ।
वैदिक यज्ञ और श्रद्धांजलि से गूंजा पूरा परिसर
कार्यक्रम के दौरान डॉ. कपिल देव वेदालंकार ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सर्व मंगल यज्ञ संपन्न कराया, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्र और समाज की उन्नति के लिए आहुति दी।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में शामिल रहे:
- राकेश आर्य – मंत्री, पश्चिमी दिल्ली वेद प्रचार मंडल
- सुरेंद्र आर्य – प्रधान, रोहिणी मंडल
- विनीत बहल – मंत्री, दीवान हाल
- ग्रामीण क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में आर्य समाज के अनुयायी
आज भी प्रेरणा हैं स्वामी श्रद्धानंद
वक्ताओं ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जीवन साहस, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सुधार का अद्भुत संगम था। उन्होंने न केवल अंग्रेजी शासन का विरोध किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ भी निर्णायक संघर्ष किया।
आज के दौर में उनका जीवन और विचार नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
क्यों खास है यह आयोजन? (विश्लेषण)
- स्वामी श्रद्धानंद का योगदान केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल थे
- उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत किया
- उनकी गुरुकुल शिक्षा मॉडल आज नई शिक्षा नीति में भी प्रासंगिक माना जा रहा है
- आर्य समाज के माध्यम से उन्होंने समाज सुधार का बड़ा अभियान चलाया
निष्कर्ष
स्वामी श्रद्धानंद का 170वां जन्मोत्सव केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके विचारों और योगदान को याद करने का अवसर था। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में शिक्षा, समानता और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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