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कैशलेस इलाज से वंचित कर्मचारी, काली पट्टी बांधकर परीक्षा ड्यूटी—सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा

कैशलेस इलाज से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारी: काली पट्टी बांधकर बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी, सरकार के खिलाफ बढ़ा आक्रोश

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📍 बिजनौर | विशेष संवाददाता

उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। सरकार द्वारा शिक्षकों को यह सुविधा देने के बावजूद शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इससे बाहर रखने पर कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। विरोध स्वरूप कर्मचारी बोर्ड परीक्षाओं के दौरान भी बांह पर काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

परीक्षा ड्यूटी के साथ विरोध: काली पट्टी बना असंतोष का प्रतीक

प्रदेश संगठन के आह्वान पर बिजनौर सहित पूरे प्रदेश में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। शनिवार को भी जिले के दर्जनों माध्यमिक विद्यालयों में कर्मचारियों ने परीक्षा कार्य करते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।

कर्मचारियों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन चिकित्सा सुविधा के मामले में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

शिक्षकों को मिला लाभ, कर्मचारियों को नहीं: भेदभाव का आरोप

प्रदेश सरकार ने हाल ही में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी किया था। लेकिन शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है।

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा और प्रदेश महामंत्री पुंडीर ने इस संबंध में शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री, उप मुख्यमंत्री और विधान परिषद सभापति को पत्र भेजकर तत्काल शासनादेश जारी करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, लेकिन अब तक नहीं हुई कार्रवाई

प्रदेश संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कर्मचारियों के साथ हो रही ‘नाइंसाफी’ से अवगत कराया है। शिक्षक विधायकों ने भी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग उठाई है, लेकिन अभी तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ।

इससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी दिया समर्थन

इस आंदोलन को और मजबूती तब मिली जब विद्यालयों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांधकर समर्थन दिया। इससे आंदोलन का दायरा और व्यापक हो गया है।

जिलाध्यक्ष का ऐलान: मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

जिलाध्यक्ष मुकेश सिन्हा और प्रदेश मंत्री योगेश कुमार ने स्पष्ट कहा है कि—

“जब तक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक पूरे प्रदेश में काली पट्टी बांधकर विरोध जारी रहेगा।”

उन्होंने बताया कि बिजनौर सहित पूरे प्रदेश में बोर्ड परीक्षा के दौरान भी कर्मचारी विरोध जारी रखेंगे।

विश्लेषण: शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारी क्यों उपेक्षित?

शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालयों की प्रशासनिक और परीक्षा व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। परीक्षा संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • समान कार्य व्यवस्था में अलग-अलग सुविधाएं देना असंतोष को जन्म देता है
  • इससे शिक्षा व्यवस्था की कार्यकुशलता प्रभावित हो सकती है
  • सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए

आगे क्या?

यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कर रहे हैं, लेकिन उनकी नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

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👉 क्या शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शिक्षकों के समान चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

 

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