लखनऊ बना नई फिल्म नगरी! ‘श्याम शरण में आजा रे’ की शूटिंग से खुलेंगे हजारों अवसर
आध्यात्मिक-सामाजिक संदेश वाली फिल्म से स्थानीय कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री को मिलेंगे नए अवसर
📍 लखनऊ | डिजिटल डेस्क के लिए जे.पी. त्यागी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर फिल्म निर्माण गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। खरी कसौटी प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने जा रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘श्याम शरण में आजा रे’ का शुभ मुहूर्त समारोह पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस फिल्म की खास बात यह है कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि आस्था, सामाजिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
फिल्म यूनिट के अनुसार, इस फिल्म की शूटिंग अगले 30 दिनों तक लखनऊ के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लोकेशनों पर होगी, जिससे न सिर्फ शहर की खूबसूरती बड़े पर्दे पर दिखेगी बल्कि स्थानीय कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
फिल्म का उद्देश्य: मनोरंजन के साथ सकारात्मक संदेश
फिल्म के निर्माता के. सी. विश्नोई ने मुहूर्त समारोह में कहा—
“यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा है। हमारा उद्देश्य दर्शकों तक विश्वास, संस्कार और जीवन के मूल मूल्यों का संदेश पहुँचाना है।”
उन्होंने लखनऊ के सहयोगी माहौल की सराहना करते हुए कहा कि शहर की सांस्कृतिक विरासत फिल्म को एक अलग पहचान देगी।
निर्देशक संदीप सिंह के अनुसार, फिल्म की कहानी समाज और आस्था के बीच के गहरे संबंध को दर्शाएगी और दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास करेगी।
लखनऊ में शूटिंग: क्यों बन रहा फिल्ममेकर्स की पहली पसंद?
पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ तेजी से फिल्म शूटिंग का प्रमुख केंद्र बना है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
- ऐतिहासिक इमारतें और विरासत स्थल
- आधुनिक और पारंपरिक लोकेशन का अनोखा मिश्रण
- सरकारी स्तर पर फिल्म शूटिंग को बढ़ावा
- स्थानीय कलाकारों की उपलब्धता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फिल्में फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं।
स्टारकास्ट और टीम: नए और अनुभवी कलाकारों का संगम
फिल्म के प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं:
- हीरो: बबलू चक्रवर्ती
- हीरोइन: संजना मिश्रा
- कलाकार: शिव मिश्रा (मुंबई)
साथ ही सह-निर्माता सरोज त्रिवेदी और पूरी तकनीकी टीम ने मुहूर्त में हिस्सा लिया।
जनप्रतिनिधियों ने बताया—फिल्में बढ़ाती हैं शहर की पहचान
कार्यक्रम में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रतिनिधि और पार्षद के. एन. सिंह ने कहा—
“लखनऊ में फिल्म निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है और शहर की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है।”
विश्लेषण: यूपी में उभरता नया फिल्म इकोसिस्टम
उत्तर प्रदेश सरकार की फिल्म नीति और बढ़ती सुविधाओं के कारण लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहर अब फिल्म निर्माताओं की पसंद बन रहे हैं।
इस फिल्म के माध्यम से संभावित प्रभाव:
✔ स्थानीय कलाकारों को काम
✔ होटल, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर को लाभ
✔ शहर की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि
✔ फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसे प्रोजेक्ट लगातार आते रहे तो लखनऊ भविष्य में मुंबई और हैदराबाद के बाद एक महत्वपूर्ण फिल्म हब बन सकता है।
आस्था और सिनेमा का अनोखा संगम
‘श्याम शरण में आजा रे’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रयास के रूप में देखी जा रही है। लखनऊ की धरती पर शुरू हुई यह फिल्म आने वाले समय में न केवल दर्शकों के दिलों को छू सकती है बल्कि शहर को फिल्म इंडस्ट्री के नक्शे पर और मजबूत कर सकती है।
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