हर शुक्रवार सरकारी गाड़ी से नमाज़? अदना कर्मचारी पर, गंभीर आरोप, बिना अधिकारी अनुमति वाहन उपयोग पर उठे सवाल
बिजनौर | डिजिटल डेस्क। सूचना विभाग की सरकारी गाड़ी के कथित दुरुपयोग का मामला अब और गहराता जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग में कार्यरत एक अनाधिकृत कर्मचारी (उर्दू अनुवादक) द्वारा नियमित रूप से, खासकर प्रत्येक शुक्रवार को, नमाज़ अदा करने के लिए सरकारी वाहन का उपयोग किए जाने का आरोप है। साथ ही अन्य कार्यालयी उपकरणों के निजी उपयोग की भी चर्चा तेज है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगी।
📍 क्या है पूरा घटनाक्रम?
सूत्रों के अनुसार, सूचना विभाग से जुड़े उर्दू अनुवादक मुशर्रत अली पर लंबे समय से सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में रेलवे स्टेशन के सामने विभागीय वाहन देखे जाने के बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आया।
बताया गया कि वाहन स्टेशन पार्किंग में रुका, जहां से संबंधित कर्मचारी पास की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने गए, जबकि चालक मोहन और कंप्यूटर ऑपरेटर रोहित कुमार गाड़ी में ही मौजूद रहे। इस घटनाक्रम का वीडियो बनाए जाने की भी चर्चा है।
🔁 हर शुक्रवार दोहराई जाती थी प्रक्रिया?
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि कथित रूप से प्रत्येक शुक्रवार को इसी प्रकार सरकारी वाहन का उपयोग किया जाता रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नियमित और योजनाबद्ध दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
बिना अधिकारी अनुमति कैसे संभव?
जानकारों का कहना है कि उर्दू अनुवादक विभाग का एक अदना कर्मचारी है। नियमों के अनुसार सरकारी वाहन का उपयोग बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति संभव नहीं होता। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या वाहन उपयोग की पूर्व अनुमति ली गई थी?
- यदि नहीं, तो वाहन कैसे जारी हुआ?
- क्या कार्यालयी समय में निजी कार्य के लिए वाहन का इस्तेमाल किया गया?
यदि यह सब कार्यालय समय में और बिना अनुमति हुआ है, तो मामला और गंभीर हो जाता है।
कार्यालयी उपकरणों के निजी उपयोग के आरोप
मामला केवल वाहन तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, विभाग के अन्य कार्यालयी उपकरणों के निजी कार्यों में इस्तेमाल की भी चर्चा है। यदि जांच में यह तथ्य सामने आते हैं, तो यह सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाएगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की सूचना प्रभारी सूचना अधिकारी एवं उप जिला अधिकारी हर्ष चावला को दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जानकारी ली जा रही है और आवश्यक होने पर जांच कराई जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाने पर विभागीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।
नियम क्या कहते हैं?
- सरकारी वाहन केवल शासकीय कार्यों के लिए निर्धारित होते हैं।
- कार्यालय समय में निजी कार्य हेतु संसाधनों का उपयोग अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
- दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मचारी, चालक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।
उठते अहम सवाल
- क्या वाहन उपयोग का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद है?
- क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी?
- क्या विभागीय निगरानी प्रणाली प्रभावी है?
- क्या कार्यालय समय में निजी गतिविधि की अनुमति थी?
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक कर्मचारी के कथित आचरण का नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था, नियंत्रण प्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा है। सरकारी संसाधन जनता के कर से संचालित होते हैं, इसलिए उनका उपयोग नियमों के अनुरूप होना अनिवार्य है।
अब निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सके।
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