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गजरौला त्रासदी: 53वें दिन भी अडिग किसान, यूपी बजट पर भाकियू का वार—‘विकास नहीं, यह सेहत की बलि है’

गजरौला त्रासदी: 53वें दिन भी अडिग किसान, यूपी बजट पर भाकियू का वार—‘विकास नहीं, यह सेहत की बलि है’

अमरोहा | 12 फरवरी 2026 | डिजिटल स्पेशल रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपा गजरौला का जहरीला सच अब एक बड़े जनआंदोलन का चेहरा बन चुका है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना 53वें दिन भी शहबाजपुर डोर गांव में पूरी ताकत के साथ जारी है। भूजल में जहर, खेतों की बर्बादी और गांवों में फैलती जानलेवा बीमारियों ने किसानों को सड़कों पर बैठने को मजबूर कर दिया है।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश हालिया बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “गजरौला जैसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकट के लिए बजट में एक शब्द तक नहीं—यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है।” उन्होंने साफ कहा कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन, पानी और सांसों को जहर दिया जा रहा है।

हैंडपंप से जहर, गांवों में बीमारी का कहर

किसानों का आरोप है कि गजरौला स्थित केमिकल फैक्ट्रियों का जहरीला अपशिष्ट नाईपुरा और आसपास के गांवों के भूजल को पूरी तरह जहरीला बना चुका है।

  • हैंडपंपों से निकल रहा पीला और बदबूदार पानी
  • तेजी से बढ़ रहे लिवर, किडनी व हृदय रोग
  • कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का डर

ग्रामीणों का कहना है कि यही पानी पीने और खेती में इस्तेमाल करने की मजबूरी उन्हें बीमारी और बेरोजगारी दोनों की ओर धकेल रही है।

मांगें नहीं मानी गईं तो और उग्र होगा आंदोलन

धरनारत किसानों ने स्पष्ट मांग रखी है—
✔️ मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
✔️ दोषी केमिकल फैक्ट्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो
✔️ प्रभावित गांवों को स्वच्छ जल व मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा मिले

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार और प्रशासन ने आंखें बंद रखीं, तो आंदोलन जिला नहीं, प्रदेश स्तर पर फैलाया जाएगा।

इंडो-ट्रेड डील पर भी सवाल, कॉर्पोरेट मॉडल का विरोध

भाकियू नेताओं ने इंडो-ट्रेड डील जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों को किसान-विरोधी बताते हुए कहा कि ये नीतियां कॉर्पोरेट मुनाफे को बढ़ावा देती हैं, जबकि किसान और आम जनता इसकी कीमत अपनी सेहत से चुकाती है।

इसी क्रम में भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के नेतृत्व में संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी जनस्वास्थ्य, जल-जंगल-जमीन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चला रही है।

धरने में उमड़ा किसानों का सैलाब

धरने में बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। प्रमुख रूप से
एहसान अली, दिलशाद सलमानी, गंगाराम, होमपाल, समरपाल, ओमप्रकाश, महेंद्र सिंह, सोमपाल, मंसूर अली, अशद अली, हरद्वारी, धर्मवीर, अंकित कुमार, अदनान अली, चंद्रपाल सिंह सहित नाईपुरा व आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान शामिल हुए।

विकास बनाम जीवन

गजरौला का यह आंदोलन अब केवल प्रदूषण का मुद्दा नहीं रहा। यह सवाल बन गया है—क्या विकास की कीमत इंसानी जिंदगी हो सकती है?
यदि समय रहते सरकार ने पारदर्शी जांच, कड़ा एक्शन और राहत पैकेज नहीं दिया, तो गजरौला की यह चिंगारी पूरे प्रदेश में किसान और पर्यावरण आंदोलन की आग बन सकती है।

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