NH-119 सड़क परियोजना में बड़ा पर्यावरणीय विस्फोट: अभयारण्य बना अवैध गतिविधियों ज़ोन, NHAI अधिकारी-कर्मचारी कटघरे में
वन्यजीव क्लीयरेंस की खुलेआम अवहेलना, वन कर्मियों से मारपीट, एक आरोपी जेल, कई फरार
बिजनौर | 21 जनवरी 2026 | अवनीश त्यागी की स्पेशल रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में NH-119 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना अब केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह पर्यावरण विनाश, वन अपराध और प्रशासनिक संरक्षण का गंभीर उदाहरण बनती जा रही है।
सामाजिक वानिकी प्रभाग, बिजनौर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति ने NHAI और उसके ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अभयारण्य में विकास या विनाश ? निरीक्षण में चौंकाने वाले खुलासे
दिनांक 20 जनवरी 2026 को किए गए स्थलीय निरीक्षण में सामने आया कि NH-119 परियोजना क्रियान्वयन इकाई ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा जारी वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों की शर्तों को लगातार और गंभीर रूप से उल्लंघन किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया—
- सेन्चुरी क्षेत्र में गति नियंत्रक व चेतावनी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए
- अवैध लेबर कैंप और डंपिंग साइट अभयारण्य के भीतर संचालित
- भारी वाहन (डंपर/लोडर) अनधिकृत रूप से संरक्षित वन क्षेत्र में खड़े
- श्रमिकों द्वारा संरक्षित वन की लकड़ी जलाना, पेड़ों को उखाड़ना व नष्ट करना
- संरक्षित वन व अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन और अवैध मिट्टी अभिवहन
- वन्यजीव सुरक्षा से संबंधित बोर्ड, बायो-फेंसिंग और अस्थायी फॉरेस्ट चेक पोस्ट का अभाव
- वन्यजीवों के लिए आवश्यक पैसेज प्लान तक उपलब्ध नहीं
कानूनी शिकंजा: NHAI अधिकारियों पर वन अपराध दर्ज
इन गंभीर उल्लंघनों के आधार पर वन विभाग ने
वन अपराध रेंज केस संख्या-72/बिजनौर/2025-26 दर्ज करते हुए—
- भारतीय वन अधिनियम 1927
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
- जैव विविधता संरक्षण अधिनियम 2002
- वन संरक्षण अधिनियम 1980
की विभिन्न धाराओं में NHAI के अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया।
👉 इस कार्रवाई में एक अभियुक्त अनूप कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि अन्य नामित अभियुक्त फरार बताए जा रहे हैं।
वन कर्मियों से मारपीट, लेकिन FIR पर चुप्पी
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि
निरीक्षण के दौरान वन कर्मियों के साथ मारपीट की गई और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई।
इस संबंध में थाना अध्यक्ष को प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई।
इसके उलट, वन विभाग के मुकदमे में नामित वांछित और फरार अभियुक्त कावल सिंह के कथित झूठे प्रार्थना पत्र पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया जाना निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पहले से दर्ज हैं कई गंभीर वन अपराध
NH-119 परियोजना से जुड़े ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं—
- गंगा नदी से रेत का अवैध खनन – वन अपराध संख्या 42/2024-25
- ईको-सेंसिटिव ज़ोन में अवैध खनन – वन अपराध संख्या 53/2025-26
- संरक्षित क्षेत्र में अवैध वृक्ष पातन – रेंज केस संख्या 10/2025-26
- अवैध खनन व अवैध अभिवहन – रेंज केस संख्या 68/2025-26
इन सभी मामलों में विधिक कार्यवाही वर्तमान में प्रचलित है।
संरक्षण देने वालों की भूमिका संदिग्ध
वन विभाग का आरोप है कि
लगातार हो रहे वन अपराधों के बावजूद NHAI के परियोजना निदेशक एवं SDO द्वारा ठेकेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है,
जिससे वन अपराधों में उनकी संलिप्तता स्वतः उजागर होती है।
झूठी FIR का आरोप, वन विभाग ने किया खंडन
वन विभाग का दावा है कि
अपने विरुद्ध दर्ज मामलों से दबाव बनाने के उद्देश्य से
NHAI द्वारा अपने ट्रक चालक के माध्यम से वन अधिकारियों व कर्मचारियों को डराने के लिए झूठी FIR दर्ज कराई गई,
जिसका विभाग ने स्पष्ट और लिखित खंडन किया है।
विकास बनाम पर्यावरण—कौन जिम्मेदार?
NH-119 परियोजना का यह प्रकरण यह सवाल छोड़ जाता है कि—
- क्या राष्ट्रीय परियोजनाओं के नाम पर अभयारण्यों को कुर्बान किया जा सकता है?
- क्या वन्यजीव क्लीयरेंस केवल कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गई है?
- और क्या प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर वन अपराध संभव हैं?
अब यह देखना अहम होगा कि
राज्य व केंद्र स्तर पर इस मामले में कितनी सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई होती है।
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