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राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फ़िन पर बड़ा सर्वे, बिजनौर से आगाज़

गंगा की डॉल्फ़िन पर देश की सबसे बड़ी वैज्ञानिक नज़र! बिजनौर से शुरू हुई भारत की द्वितीय रेंजवाइड गणना

प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत ऐतिहासिक पहल, 13 ज़िलों के वन अफसर हुए प्रशिक्षित, 30 शोधकर्ता उतरेंगे गंगा में

बिजनौर | उत्तर प्रदेश | अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट
भारत की नदियों में जीवन का संकेत मानी जाने वाली गंगा डॉल्फ़िन के संरक्षण की दिशा में एक और निर्णायक कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), भारत सरकार द्वारा प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के अंतर्गत नदी डॉल्फ़िन की द्वितीय रेंजवाइड गणना का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से किया गया है। यह अभियान देशभर में डॉल्फ़िन की संख्या, वितरण और उनके अस्तित्व पर मंडराते खतरों को वैज्ञानिक रूप से दर्ज करेगा।

बिजनौर बना राष्ट्रीय डॉल्फ़िन सर्वे का प्रमुख केंद्र

इस राष्ट्रीय स्तर के डॉल्फ़िन निगरानी कार्यक्रम की प्रथम क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला बिजनौर में आयोजित की गई, जिसमें 13 जनपदों के वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के नेतृत्व में किया गया, जिसमें राज्य वन विभागों के साथ-साथ WWF-इंडिया और अन्य NGOs का भी सहयोग रहा।

वैज्ञानिक प्रशिक्षण से लैस हुए वनकर्मी

एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को:

  • डॉल्फ़िन की पारिस्थितिकी और व्यवहार
  • वैज्ञानिक सर्वेक्षण तकनीकें
  • डेटा संग्रह, मैपिंग और विश्लेषण
  • नदी में प्रत्यक्ष फील्ड सर्वे प्रशिक्षण

जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य फील्ड स्तर पर एकरूप, सटीक और विश्वसनीय डेटा सुनिश्चित करना है।

WII के विशेषज्ञों ने साझा किया राष्ट्रीय अनुभव

भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से
डॉ. विष्णुप्रिया कोलिपाकम (परियोजना प्रभारी),
प्रो. क़मर कुरैशी, डॉ. विनीत सिंह,
हियाश्री शर्मा, मेरिन जैकब और गार्गी रॉय चौधरी
सहित शोधकर्ताओं की टीम ने डॉल्फ़िन संरक्षण, सर्वे पद्धति और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित तकनीकी जानकारियाँ साझा कीं।

गंगा डॉल्फ़िन: नदी स्वास्थ्य का जीवंत संकेत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री ज्ञान सिंह, सहायक वन संरक्षक, बिजनौर ने कहा कि गंगा डॉल्फ़िन केवल एक जलीय जीव नहीं, बल्कि नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिक संतुलन का जीवंत संकेतक है। उन्होंने कहा कि डॉल्फ़िन संरक्षण के बिना गंगा के पुनर्जीवन की कल्पना अधूरी है।

कल से गंगा में उतरेगी 30 शोधकर्ताओं की टीम

प्रशिक्षण के उपरांत भारतीय वन्यजीव संस्थान के 30 विशेषज्ञ शोधकर्ता,
उत्तर प्रदेश वन विभाग और WWF-इंडिया के सहयोग से
बिजनौर से डॉल्फ़िन सर्वेक्षण का औपचारिक फील्ड अभियान शुरू करेंगे। यह सर्वे कई चरणों में गंगा नदी के विभिन्न हिस्सों में किया जाएगा।

नीति और संरक्षण की रीढ़ बनेगा यह सर्वे

यह द्वितीय रेंजवाइड गणना देश की नदियों और मुहानों में:

  •  डॉल्फ़िन की वर्तमान आबादी,
  • भौगोलिक वितरण,
  • मानवजनित और प्राकृतिक खतरों,

पर प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराएगी। यही आंकड़े भविष्य में राष्ट्रीय संरक्षण नीतियों, नदी प्रबंधन योजनाओं और जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रमों की दिशा तय करेंगे।

क्यों है यह सर्वे देश के लिए बेहद अहम?

✔ गंगा डॉल्फ़िन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव
✔ नदियों के स्वास्थ्य का सबसे भरोसेमंद संकेतक
✔ संरक्षण से जुड़ा वैश्विक दायित्व
✔ गंगा सफाई और नदी पुनर्जीवन अभियानों को वैज्ञानिक आधार

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