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संपत्ति विवरण नहीं भरा तो रुकेगी पदोन्नति, होगी विभागीय कार्रवाई

31 जनवरी की डेडलाइन खत्म होते ही गिरेगी गाज!

 संपत्ति विवरण नहीं भरा तो रुकेगी पदोन्नति, होगी विभागीय कार्रवाई

मानव संपदा पोर्टल पर लापरवाही पड़ेगी भारी, सरकार का सख्त अल्टीमेटम

लखनऊ/प्रदेश ब्यूरो।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को लेकर अब तक का सबसे सख्त और निर्णायक संदेश जारी किया है। मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज करने में कोताही अब केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
सरकार ने साफ कर दिया है कि 31 जनवरी 2026 के बाद जो कर्मचारी संपत्ति विवरण नहीं भरेंगे, उनके लिए पदोन्नति, चयन, और कैरियर ग्रोथ के रास्ते बंद हो सकते हैं।

क्या है सरकार का ताज़ा आदेश?

अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त एवं नोडल अधिकारी (मानव संपदा) द्वारा जारी अनुस्मारक/समयबद्ध आदेश में—

  • सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश
  • अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से
  • मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अनिवार्य रूप से भरवाने के आदेश

यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 (नियम-24) के तहत जारी किया गया है।

 सरकारी समीक्षा में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

सरकारी स्तर पर 14 जनवरी 2026 को की गई समीक्षा में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चिंताजनक हैं—

  • कुल कार्मिक: 47,468
  • विवरण भरने वाले: मात्र 4,181
  • अब तक नहीं भरने वाले: 43,000 से अधिक
  • अनुपालन प्रतिशत: सिर्फ करीब 9%

इन आंकड़ों ने शासन को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया।

 31 जनवरी के बाद क्या-क्या होगा?

सरकार ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि—

  •  संपत्ति विवरण न भरना प्रतिकूल आचरण माना जाएगा
  • पदोन्नति के प्रकरणों पर विचार नहीं किया जाएगा
  •  चयन समितियों में ऐसे मामलों को रोक दिया जाएगा
  • अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू होगी
  •  यूपी सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कार्रवाई

अर्थात, लापरवाही सीधे तौर पर नौकरी के भविष्य पर असर डालेगी।

 किन कर्मचारियों को मिली है राहत?

शासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है—

  •  जिन कर्मचारियों को पहले
    संपत्ति विवरण से छूट दी गई थी
  •  उनकी छूट अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी

हालाँकि यह छूट सीमित और विशेष परिस्थितियों में ही मान्य होगी।

मानव संपदा पोर्टल क्यों बना सख्ती का केंद्र?

मानव संपदा पोर्टल—

  •  कर्मचारियों के डेटा का डिजिटल रिकॉर्ड
  •  पारदर्शिता और जवाबदेही का माध्यम
  •  अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार पर निगरानी का टूल
  •  ई-गवर्नेंस का मजबूत आधार

सरकार का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग से ही प्रशासनिक सुधार संभव है।

विश्लेषण: क्या संकेत दे रही है यह सख्ती?

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • यह कदम भ्रष्टाचार पर अप्रत्यक्ष प्रहार है
  • संपत्ति विवरण से आय और संपत्ति का मिलान आसान होगा
  • भविष्य में जांच और सतर्कता कार्रवाई का आधार बनेगा
  • सरकारी तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी

सरकार अब सिर्फ निर्देश नहीं, परिणाम चाहती है

निष्कर्ष: अब नहीं चलेगी ढिलाई

यदि आप राज्य कर्मचारी हैं और अब तक आपने—

  • ❌ संपत्ति विवरण नहीं भरा
  • ❌ इसे टालते आ रहे हैं

तो समझ लीजिए घड़ी की सुई तेज़ी से चल रही है
31 जनवरी 2026 अंतिम मौका है।
इसके बाद कैरियर पर सीधा असर तय है।

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