नुक्कड़ नाटक से गुलदार–मानव संघर्ष पर सीधा वार
वन विभाग और मरीचिका फिल्म प्रोडक्शन की अनोखी पहल, गांव-गांव पहुंचा जागरूकता संदेश
बिजनौर | डिजिटल डेस्क
ज़िले में लंबे समय से चली आ रही मानव–गुलदार टकराव की गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में वन विभाग ने एक रचनात्मक और असरदार कदम उठाया है। वन विभाग और मरीचिका फिल्म प्रोडक्शन के संयुक्त तत्वावधान में नुक्कड़ नाटक के ज़रिये गुलदार से बचाव, सतर्कता और सह-अस्तित्व का संदेश सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया गया।
यह अभियान न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीणों के मन में बैठे भय और भ्रम को भी दूर करने में सफल रहा।
नुक्कड़ नाटक बना संवाद का सशक्त माध्यम
वन विभाग के डीएफओ जय सिंह कुशवाह और एसडीओ ज्ञान सिंह के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान में नुक्कड़ नाटक के ज़रिये गुलदार के स्वभाव, उसके आवास, मानव व्यवहार की भूमिका और सुरक्षित उपायों को सरल भाषा में समझाया गया।
एसडीओ ज्ञान सिंह ने स्पष्ट कहा कि—
“गुलदार समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब प्रशासन और समाज मिलकर सतर्कता और जागरूकता के साथ आगे बढ़ें।”
कलाकारों ने जीवंत किया संवेदनशील मुद्दा
मरीचिका फिल्म प्रोडक्शन के डायरेक्टर अभिकान्त राजपूत द्वारा लिखित और शान मोहम्मद के निर्देशन में प्रस्तुत इस नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने शानदार अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा।
नाटक से जुड़े प्रमुख कलाकार
- के.के. पीपल
- अमित मिश्रा
- सफल शर्मा
नाटक में डर, अफवाह, असावधानी और सही व्यवहार के बीच फर्क को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
इन गांवों में हुआ आयोजन
यह जनजागरूकता कार्यक्रम चांदपुर रेंज के अतिप्रभावित गांवों में आयोजित किया गया—
- ग्राम लाडूपुरा
- ग्राम नाईपुरा
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ और उत्साह देखने को मिला। लोगों ने सवाल पूछे और वन विभाग के अधिकारियों से सीधे संवाद किया।
वन विभाग की टीम का रहा अहम योगदान
- रेंजर चांदपुर – श्री दुष्यन्त सिंह का आयोजन में विशेष सहयोग
- ग्रामीणों को हेल्पलाइन, सतर्कता उपाय और सूचना तंत्र की जानकारी दी गई
क्यों अहम है यह अभियान? (विश्लेषण)
- ✔️ केवल कार्रवाई नहीं, व्यवहार परिवर्तन पर ज़ोर
- ✔️ ग्रामीणों में डर की जगह समझ विकसित करना
- ✔️ अफवाहों पर रोक और सही सूचना का प्रसार
- ✔️ वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन
विशेषज्ञ मानते हैं कि नुक्कड़ नाटक जैसे लोकमाध्यम ग्रामीण समाज में सबसे प्रभावी साबित होते हैं और दीर्घकालिक समाधान की नींव रखते हैं।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता अभियानों को निरंतर चलाया जाएगा, ताकि मानव और वन्यजीव के बीच टकराव को न्यूनतम किया जा सके।
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