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PWD–सेतु निगम पर जांच, उद्योग व NRLM को डीएम की कड़ी चेतावनी

PWD–सेतु निगम पर जांच, उद्योग व NRLM को डीएम की कड़ी चेतावनी

 

 

 

विश्लेषणात्मक समाचार रिपोर्ट अवनीश त्यागी 

बिजनौर | 14 जनवरी 2026 मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिले की फिसलती रैंकिंग अब सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गई है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सीएम डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में ऐसा सख्त रुख अपनाया कि कई विभागों में हड़कंप मच गया। डी-रैंकिंग को गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए डीएम ने एक साथ निर्माण कार्यों की जांच, रैंक सुधार के अल्टीमेट निर्देश और डिजिटल सिस्टम पर कड़ाई लागू कर दी।

PWD और सेतु निर्माण निगम पर सीधी कार्रवाई की तैयारी

डीएम ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और सेतु निर्माण निगम द्वारा विलंब से शुरू किए गए निर्माण कार्यों को लेकर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि—

  • कार्य समय पर क्यों शुरू नहीं हुए, इसकी तथ्यपरक जांच हो
  • निर्माण कार्यों की गुणवत्ता मानकों के अनुसार जांच कराई जाए
  • शासन से स्वीकृत सेतु निर्माण आदेश पत्रों का सत्यापन किया जाए

इन सभी बिंदुओं पर जांच के लिए एसडीएम धामपुर की अध्यक्षता में तकनीकी समिति गठित करने के आदेश दिए गए। यह स्पष्ट संकेत है कि अब कागजी प्रगति नहीं, जमीनी काम ही चलेगा।

NRLM और उद्योग विभाग की डी-रैंकिंग बनी चिंता

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर NRLM और उद्योग विभाग को मिली डी रैंक पर जिलाधिकारी ने कड़ा असंतोष जताया।
उन्होंने स्पष्ट कहा—

“डी-रैंकिंग सीधे तौर पर विभागीय कार्यशैली पर सवाल है।”

विशेष रूप से उद्योग विभाग की लगातार गिरती रैंकिंग पर डीएम ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि—

  • ओडीओपी सहित सभी योजनाओं की रीयल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए
  • लक्ष्य आधारित कार्य योजना बनाकर उच्चाधिकारियों से समन्वय किया जाए
  • रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो

अब हर दिन होगी CM डैशबोर्ड की परीक्षा

डीएम जसजीत कौर ने साफ किया कि अब—

  • सभी अधिकारी प्रतिदिन CM डैशबोर्ड की मॉनिटरिंग करेंगे
  • पोर्टल पर अपलोड होने वाला डाटा 100% सही और सत्यापित होगा
  • गलत या अधूरा डाटा सीधे जिले की रैंकिंग को नुकसान पहुंचाएगा

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा माननीय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्वयं करते हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही गंभीर मानी जाएगी।

ई-ऑफिस सिस्टम पर सख्ती, फाइल कल्चर को अलविदा

जिलाधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर ई-ऑफिस प्रणाली की नियमित निगरानी की जा रही है।
अब सभी विभागों को—

  • अपने समस्त शासकीय कार्य ई-ऑफिस के माध्यम से करने होंगे
  • भविष्य में प्रशासनिक मूल्यांकन में डिजिटल कार्यप्रणाली भी एक अहम पैमाना होगी

यह आदेश उन विभागों के लिए साफ संदेश है, जो अब भी पारंपरिक फाइल सिस्टम पर निर्भर हैं।

टॉप-10 जिलों में पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य

बैठक में परिवहन, जीएसटी, ऊर्जा, कृषि, उद्यान, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निगम, पंचायत राज, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, MSME, पशुपालन, आपदा प्रबंधन समेत लगभग सभी विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई।
डीएम ने दो टूक कहा—

“किसी भी हालत में रैंक गिरनी नहीं चाहिए, लक्ष्य है—बिजनौर को टॉप-10 जिलों में लाना।”

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

इस अहम समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए दिनकर भारती, जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी लक्ष्मी देवी, धर्मवीर सिंह, तथा PWD, आरईएस, विद्युत, जल निगम, स्वास्थ्य सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

विश्लेषण: चेतावनी नहीं, सिस्टम सुधार का संकेत

डीएम जसजीत कौर का यह कड़ा रुख साफ दर्शाता है कि अब जिले में शासन की दिशा परफॉर्मेंस आधारित प्रशासन की ओर बढ़ रही है।

  • जहां निर्माण कार्यों में देरी पर जांच है
  • वहीं डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश है
  • और रैंकिंग के जरिए विभागीय जवाबदेही तय की जा रही है

 आने वाले दिनों में इसका असर न सिर्फ रैंकिंग पर, बल्कि जमीनी विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता पर भी साफ नजर आएगा।

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