शीतलहर का कहर: प्रशासन अलर्ट, किसानों-पशुपालकों से लेकर वाहन चालकों तक के लिए जारी हुई सख़्त एडवाइजरी
रिपोर्ट । डिजीटल डेस्क
बिजनौर | 13 जनवरी 2026
उत्तर भारत में तेज़ होती शीतलहर को देखते हुए बिजनौर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने शासन की ओर से जारी विस्तृत एडवाइजरी की जानकारी देते हुए आमजन, किसानों, पशुपालकों और वाहन चालकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। यह एडवाइजरी केवल औपचारिक चेतावनी नहीं, बल्कि जान-माल, पशुधन और फसलों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक कदम है।
सड़क सुरक्षा पर ज़ोर: ओवरलोडिंग और लापरवाही पर खतरा
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गन्ना, भूसा आदि ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक व बैलगाड़ियों में क्षमता से अधिक भार न लादा जाए। कोहरे और शीतलहर के दौरान फॉग लाइट का अनिवार्य प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही, भारी वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पीछे से आ रही एम्बुलेंस को तत्काल रास्ता दिया जाए, ताकि आपातकालीन सेवाएं बाधित न हों।
दोपहिया चालकों के लिए चेतावनी
शीतलहर में दोपहिया वाहन चालकों को केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है। बाहर निकलते समय गर्म कपड़े, दस्ताने, चश्मा और हेलमेट पहनना अनिवार्य बताया गया है। यह निर्देश सीधे तौर पर ठंड से होने वाली दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।
अंगीठी-हीटर से सावधान! जानलेवा हो सकती है लापरवाही
प्रशासन ने अंगीठी, मिट्टी तेल के चूल्हे और हीटर के प्रयोग को लेकर विशेष चेतावनी दी है।
कमरों में पर्याप्त वायु-संचार बनाए रखना अनिवार्य बताया गया है, क्योंकि बंद कमरों में गैस और धुएं से दम घुटने की घटनाएं शीतलहर में बढ़ जाती हैं।
हाइपोथर्मिया के लक्षण पहचानना जरूरी
एडवाइजरी में ठंड लगने और हाइपोथर्मिया के गंभीर लक्षणों पर भी ध्यान दिलाया गया है, जैसे—
- हाथ-पैर सुन्न होना
- उंगलियों पर सफेद या नीले दाग
- अत्यधिक ठिठुरन, सुस्ती, थकान
- याददाश्त कमजोर होना, तुतलाना
इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों के लिए अहम निर्देश
ठंड के मौसम में पशुओं में थनैला, मिल्क फीवर, नेमोटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन ने पशुपालकों को सलाह दी है कि—
- पशुओं को रात में खुले में न बांधें
- गुड़ और कैल्शियम टॉनिक पिलाएं
- जूट की बोरी या पुराने कंबल से ढककर रखें
- गर्भवती पशुओं के पास अलाव जलाएं, लेकिन सुरक्षित दूरी बनाए रखें
फसलों पर शीतलहर का सीधा असर
शीतलहर और पाले से फसलों में काला रतुआ, सफेद रतुआ, पछेती झुलसा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे अंकुरण, वृद्धि, फूल, उपज और भंडारण क्षमता प्रभावित होती है।
किसानों को ठंड प्रतिरोधी किस्मों की खेती, नर्सरी और युवा पौधों को प्लास्टिक शीट या छप्पर से ढकने की सलाह दी गई है ताकि तापीय संरक्षण मिल सके।
विश्लेषण
यह एडवाइजरी केवल चेतावनी नहीं, बल्कि शीतलहर से होने वाले संभावित मानवीय, आर्थिक और कृषि नुकसान को रोकने की रणनीति है। प्रशासन की यह सक्रियता यदि ज़मीनी स्तर पर अमल में लाई जाती है, तो सर्दी के मौसम में होने वाली दुर्घटनाओं, मौतों और फसल क्षति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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