गजरौला में ज़हरीला पानी, 22 दिन से किसान धरने पर: प्रभारी मंत्री केपी मलिक बोले— “जांच रिपोर्ट आएगी, तभी होगी कार्रवाई”
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
अमरोहा | 12 जनवरी 2026
गजरौला औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहे दूषित जल ने जनस्वास्थ्य और खेती—दोनों को गंभीर संकट में डाल दिया है। 22 दिनों से बेमियादी धरने पर बैठे किसानों की पीड़ा आखिरकार सरकार तक पहुंची है। उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री तथा जनपद प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने कहा है कि डीएम द्वारा गठित जांच समिति मामले की पड़ताल कर रही है, रिपोर्ट मिलने के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।
पीला, बदबूदार पानी… बीमारी और बर्बादी की कहानी
गजरौला और आसपास के गांवों में हालात चिंताजनक हैं। खेतों के ट्यूबवैल हों या घरों के हैंडपंप—हर जगह से पीला और दुर्गंधयुक्त पानी निकल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रासायनिक कारखानों से निकला अपशिष्ट जल भूगर्भ में फैल चुका है, जिससे न सिर्फ पीने का पानी जहरीला हो गया है, बल्कि खेती भी चौपट होती जा रही है।
किसानों का आरोप: स्वास्थ्य पर सीधा हमला
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के नेतृत्व में किसान 22वें दिन भी धरने पर डटे हैं। उनका दावा है कि दूषित पानी के कारण गांवों में—
- नपुंसकता के मामले बढ़ रहे हैं
- लीवर, टायफाइड और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं
- खेतों की उर्वरा शक्ति घट रही है
- फसलें और पशु नस्लें बर्बाद हो रही हैं
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय किसानों और गरीबों की बात करने वाले जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठा मुद्दा
सोमवार को अमरोहा के एक होटल में विकसित भारत जी राम जी कानून पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री केपी मलिक को गजरौला की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। इस पर मंत्री ने कहा कि जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स द्वारा जांच समिति गठित की जा चुकी है और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी गरम
उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G)’ कानून लागू किया है। कांग्रेस इसे ग्रामीण स्तर पर बड़ा मुद्दा मानते हुए विरोध कर रही है, जबकि भाजपा सरकार प्रदेश भर में प्रभारी मंत्रियों के जरिए अपना पक्ष रख रही है। इसी क्रम में केपी मलिक अमरोहा पहुंचे थे।
बड़ा सवाल: जांच के बाद कब होगी कार्रवाई?
22 दिन का धरना, गंभीर बीमारियों के आरोप और खेती पर मंडराता संकट—इन सबके बीच अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। सवाल यही है कि
क्या रिपोर्ट आने के बाद ठोस कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
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