अगर सम्मान नहीं कर सकते तो अनादर भी न करें: राघवेन्द्र सिंह राजू
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेन्द्र सिंह राजू ने कहा कि
समाज और देश के लिए अब एक नई शुरुआत की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या समाज का
सम्मान करना संभव न हो, तो उसका अनादर भी नहीं किया जाना चाहिए।
राजपूत समाज के स्वाभिमान और बलिदान को याद करने का आह्वान
राघवेन्द्र सिंह राजू ने कहा कि राजपूत समाज ने सदैव स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान के मूल्यों को आत्मसात किया है।
आज समय आ गया है कि इन्हीं मूल्यों से प्रेरणा लेकर समाज को फिर से सशक्त बनाया जाए।
“राजपूत वे थे जिन्होंने अपने राज्य और समाज की भलाई के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी कभी पीछे नहीं हटे।”
भारत निर्माण में राजपूतों का ऐतिहासिक योगदान
वरिष्ठ समाजसेवी सुखवीर सिंह भदौरिया ने कहा कि भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने में राजपूत समाज का
योगदान अमूल्य है। उन्होंने बताया कि 565 रियासतें, 43 गढ़, 18,700 से अधिक किले और लगभग 40 लाख एकड़ भूमि
देश के एकीकरण के लिए समर्पित की गई।
स्वर्णिम राजपूत काल और वैश्विक पहचान
वक्ताओं के अनुसार राजपूत काल भारत का स्वर्णिम युग था, जब देश आर्थिक, सांस्कृतिक और सैन्य दृष्टि से
विश्व में अग्रणी था। उस समय वैश्विक जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी।
नई शुरुआत की जरूरत
राघवेन्द्र सिंह राजू ने दोहराया कि यह पहल किसी जाति या समाज के विरुद्ध नहीं है।
इसका उद्देश्य केवल ऐतिहासिक सच्चाई को सामने लाना और समाज में आत्मगौरव की भावना को मजबूत करना है।
इस अवसर पर पारस चौहान, राहुल सहित अन्य वक्ताओं ने युवाओं से अपने इतिहास को
जानने और समाज के सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की अपील की।

वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार, ग्रेटर नोएडा (गौतमबुद्ध नगर)










