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बेटियों के घातक प्रहार, बेटों की आक्रामक हुंकार — सेमीफाइनल ने कोटद्वार को बनाया रणक्षेत्र

रिंग में उठा भविष्य का शोर, पंचों में लिखी गई जीत की इबारत

बॉक्सिंग महाकुंभ का दूसरा दिन: बेटियों के घातक प्रहार, बेटों की आक्रामक हुंकार — सेमीफाइनल ने कोटद्वार को बनाया रणक्षेत्र

कोटद्वार (भाबर) | स्पेशल डिजिटल रिपोर्ट

कण्वनगरी की ऐतिहासिक धरती शनिवार को सिर्फ खेल का मैदान नहीं रही—यह जज़्बे, जुनून और जंग का अखाड़ा बन गई। 8वीं राज्य स्तरीय जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप के दूसरे दिन रिंग के भीतर जो कुछ हुआ, उसने साफ कर दिया कि उत्तराखंड का भविष्य अब मुक्कों से अपनी पहचान गढ़ रहा है
यहां हर घंटी के साथ धड़कनें तेज़ हुईं, हर पंच के साथ तालियां गूंजीं और हर जीत ने यह सवाल छोड़ दिया—अगला राष्ट्रीय स्टार कौन?

देवभूमि की बेटियाँ: जब मुक्कों ने तोड़ी चुप्पी

जिस रिंग को कभी लड़कों का गढ़ माना जाता था, उसी रिंग में जूनियर बालिकाओं ने शनिवार को आत्मविश्वास की आंधी चला दी।
सधे हुए फुटवर्क, सटीक जैब और आंखों में जीत की चमक—इन बेटियों ने दिखा दिया कि वे सिर्फ मुकाबला नहीं लड़ रहीं, बल्कि इतिहास बदल रही हैं

👉 44–46 किग्रा वर्ग में देहरादून की मुक्केबाज ने नैनीताल की खिलाड़ी को तकनीक और गति से ऐसा उलझाया कि दर्शक सीट छोड़कर खड़े हो गए। पिथौरागढ़ हॉस्टल, हरिद्वार, चम्पावत और बागेश्वर की बालिकाओं ने सेमीफाइनल में पहुंचकर साफ संदेश दिया—
“अब रिंग में बेटियों को हल्के में लेना भारी पड़ेगा।”

सेमीफाइनल की आग: बेटों ने दिखाया ‘नो मर्सी मोड’

बालक वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले किसी युद्ध से कम नहीं लगे।
13 भार वर्ग, 24 मुकाबले और हर फाइट में जान झोंक देने का जुनून—यही इस दिन की पहचान रही।

देहरादून, पिथौरागढ़, पौड़ी-A, कोटद्वार हॉस्टल, चम्पावत और नैनीताल के मुक्केबाजों ने विरोधियों को रिंग के हर कोने में परखा, और निर्णायक प्रहारों से फाइनल का टिकट झपट लिया।
यहां जीत सिर्फ ताकत से नहीं, रणनीति और धैर्य से मिली

नेतृत्व और अनुभव की छाया: रिंग से निकले ओलंपिक सपने

प्रतियोगिता का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष राज गौरव नौटियाल, वरिष्ठ खेल प्रेमी धीरेन्द्र कंडारी, जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर रावत और विधानसभा अध्यक्ष के पीआरओ पंकज पुंडीर ने किया।

अतिथियों के शब्दों ने खिलाड़ियों में नई ऊर्जा भर दी—

“यह रिंग पदक नहीं, परंपरा गढ़ रही है। यही बच्चे कल भारत की पहचान बनेंगे।”

जहाँ दिग्गज खड़े हों, वहाँ आत्मविश्वास खुद उतरता है

रिंग के बाहर खड़े पूर्व एशियन मेडलिस्ट कैप्टन देवी चंद, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक डीसी भट्ट, अंतरराष्ट्रीय रेफरी देवेंद्र सिंह जीना और जोगेंद्र सिंह बोरा खिलाड़ियों के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं रहे।
उनकी मौजूदगी ने हर खिलाड़ी को यह एहसास कराया—आप सही मंच पर हैं

कल का दिन: जब मुक्के तय करेंगे भविष्य

मीडिया प्रभारी शिवम नेगी के अनुसार, 29 दिसंबर को होने वाले फाइनल मुकाबले केवल ट्रॉफी की लड़ाई नहीं होंगे।
यहीं से चुने जाएंगे वे चेहरे, जो राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे

कल रिंग में होगा ‘अंतिम प्रहार’, और वहीं से शुरू होगी कई नई कहानियों की उड़ान।

पर्दे के पीछे के योद्धा: आयोजन समिति की मेहनत

इस खेल महाकुंभ को सफल बनाने में
रितेश अधिकारी, जगत राणा, कमल सिंह नेगी, अमित नेगी और पूरी जिला बॉक्सिंग एसोसिएशन टीम की दिन-रात की मेहनत साफ झलक रही है।

निष्कर्ष:

कोटद्वार की यह चैंपियनशिप अब एक टूर्नामेंट नहीं रही—यह उत्तराखंड के खेल आत्मसम्मान की घोषणा बन चुकी है।
यहां मुक्के सिर्फ चेहरे पर नहीं पड़ रहे, बल्कि भाग्य और भविष्य पर पड़ रहे हैं

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