कड़ाके की ठंड का ‘रेड अलर्ट’: बिजनौर में नर्सरी से 12वीं तक सभी स्कूल 29 दिसंबर को बंद
शीतलहर–कोहरे ने थाम दी पढ़ाई की रफ्तार, डीएम के निर्देश पर प्रशासन का बड़ा और सख्त फैसला
बिजनौर।
उत्तर प्रदेश में हाड़ कंपा देने वाली ठंड और जानलेवा कोहरे ने अब प्रशासन को निर्णायक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। बिजनौर जनपद में 29 दिसंबर 2025 को नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक सभी स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह स्थगित कर दी गई है। यह आदेश जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा जारी किया गया है।
एक आदेश, पूरा शिक्षा तंत्र बंद
यह फैसला किसी एक बोर्ड या स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जनपद की शिक्षा व्यवस्था पर लागू होगा—
- परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कम्पोजिट विद्यालय
- राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन मान्यता प्राप्त स्कूल
- इंटर कॉलेज व उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
- CBSE और ICSE बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूल
- संस्कृत विद्यालय और मदरसा बोर्ड से संचालित शिक्षण संस्थान
👉 नर्सरी से 12वीं तक सभी कक्षाओं में शिक्षण कार्य पूर्णतः बंद रहेगा।
क्यों लिया गया सख्त फैसला?
पिछले कई दिनों से—
- सुबह और देर रात घना कोहरा
- न्यूनतम तापमान में तेज़ गिरावट
- स्कूली बच्चों में बीमारी का बढ़ता खतरा
- सड़क दुर्घटनाओं की आशंका
को देखते हुए प्रशासन ने कोई जोखिम न लेते हुए यह एहतियाती फैसला लिया है।
आदेश की अवहेलना पर होगी कार्रवाई
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जारी आदेश में साफ शब्दों में कहा गया है—
“उक्त आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें।”
अर्थात् कोई भी स्कूल आदेश की अनदेखी नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई संभव है।
अभिभावकों को राहत, छात्रों में खुशी
अचानक घोषित इस अवकाश से—
- छोटे बच्चों के अभिभावकों ने राहत की सांस ली
- छात्रों को ठंड और कोहरे में स्कूल जाने से छुटकारा
- सोशल मीडिया पर प्रशासन के फैसले को जिम्मेदार कदम बताया जा रहा है
क्या बढ़ सकता है स्कूलों का अवकाश?
मौसम विभाग के संकेत चिंताजनक हैं। यदि—
- शीतलहर और तेज होती है
- कोहरा लगातार बना रहता है
- तापमान और नीचे गिरता है
तो अवकाश बढ़ाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
निष्कर्ष
बिजनौर प्रशासन का यह निर्णय साफ संदेश देता है कि बच्चों की जान और सेहत पढ़ाई से पहले है। मौजूदा हालात में लिया गया यह कदम न केवल जरूरी बल्कि समय पर उठाया गया साहसिक फैसला माना जा रहा है।











