वन विभाग बनाम किसान: मकान तोड़फोड़ और फसल जुताई पर भड़की भाकियू, डीएम-एसडीएम के हस्तक्षेप से बना समाधान का रास्ता
बिजनौर | 25 दिसंबर
मुजफ्फरनगर रेंज में वन विभाग की कार्रवाई से उपजे किसान आक्रोश ने मंगलवार को प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) बिजनौर के जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी बिजनौर, सदर एसडीएम समेत वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिला और किसानों के मकान तोड़े जाने व खड़ी फसल जुतवाने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया।
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरनगर रेंज में वन विभाग द्वारा कुछ किसानों के मकान तोड़ दिए गए थे, जिसको लेकर किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और बिना सहमति के यह कार्रवाई की गई। इसी तरह नजीबाबाद तहसील के नांगल खादर क्षेत्र में वन विभाग द्वारा किसानों की खड़ी फसल जुतवा दी गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
प्रशासन का बड़ा निर्देश: बिना किसान की सहमति नहीं होगी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम रितु सिंह ने वन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि—
“बिना किसान की सहमति के कहीं भी कोई मकान नहीं तोड़ा जाएगा।”
साथ ही, मुजफ्फरनगर और बिजनौर की सीमा स्पष्ट करने के लिए एक संयुक्त टीम गठित करने का आदेश भी दिया गया, ताकि भविष्य में सीमा विवाद को लेकर किसानों और वन विभाग के बीच टकराव न हो।
फसल कटाई के बाद होगी जमीन चिन्हित
नांगल खादर प्रकरण पर जिलाधिकारी बिजनौर से हुई वार्ता में किसानों ने मांग रखी कि—
- किसानों को पहले अपनी खड़ी फसल काटने दी जाए
- इसके बाद वन विभाग और किसानों की भूमि को संयुक्त रूप से चिन्हित किया जाए
इस पर प्रशासन ने संयुक्त टीम गठित करने पर सहमति जताई, जिससे भविष्य में ऐसे विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
भाकियू की दो टूक चेतावनी
भाकियू जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि—
“अगर भविष्य में बिना किसान की अनुमति के किसी भी मकान या फसल पर वन विभाग ने कार्रवाई की, तो भारतीय किसान यूनियन आंदोलन करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।”
कौन-कौन रहे मौजूद?
जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान बड़ी संख्या में किसान नेता उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सुनील प्रधान (जिला अध्यक्ष, भाकियू बिजनौर)
- योगेश शर्मा (मुजफ्फरनगर)
- सर्वेंद्र राठी
- सरदार अमीर सिंह
- मनजीत सिंह
- हरविंदर सिंह
- सरबजीत सिंह
- रजनीश अहलावत सहित अन्य किसान नेता शामिल रहे।
विश्लेषण: प्रशासनिक संतुलन या टकराव की भूमिका?
यह मामला सिर्फ जमीन या मकान का नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे और प्रशासनिक संवेदनशीलता से जुड़ा है। प्रशासन द्वारा संयुक्त टीम बनाना और बिना सहमति कार्रवाई पर रोक लगाना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन यदि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हुआ, तो यह विवाद बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।
किसान-वन विभाग टकराव के इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन का हस्तक्षेप फिलहाल राहत लेकर आया है, लेकिन असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह सहमति स्थायी समाधान में बदलती है या फिर आंदोलन की चिंगारी दोबारा सुलगती है।












