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बिजनौर में 17 जनवरी तक सख्ती, बिना हेलमेट नहीं मिलेगा पेट्रोल

🔴 No Helmet, No Fuel:

बिजनौर में 17 जनवरी तक सख्ती, बिना हेलमेट नहीं मिलेगा पेट्रोल

DM का बड़ा फैसला: सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन हुआ सख्त

बिजनौर।
अब बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना सिर्फ चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे आपकी जेब और सफर दोनों पर असर डालेगा। जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देश पर बिजनौर जनपद में ‘No Helmet No Fuel’ अभियान को एक बार फिर लागू कर दिया गया है। इस अभियान के तहत हेलमेट न पहनने वाले चालक और पिलियन सवार को पेट्रोल नहीं मिलेगा।

क्यों दोबारा शुरू हुआ अभियान?

परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के निर्देशों के क्रम में डीएम ने जानकारी दी कि यह अभियान पहले 1 सितंबर 2025 से 30 सितंबर 2025 तक चलाया गया था।
👉 उस दौरान हेलमेट पहनने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी।
👉 सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोटों के मामलों में भी कमी देखी गई थी।

इन्हीं सकारात्मक परिणामों को देखते हुए प्रशासन ने इसे पुनः 17 जनवरी 2026 तक लागू करने का निर्णय लिया है।

कानून की पूरी ताकत अभियान के साथ

यह अभियान पूरी तरह विधिसम्मत है और निम्न कानूनी प्रावधानों पर आधारित है—

  • मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129
    👉 दोपहिया वाहन चालक व पिलियन के लिए हेलमेट अनिवार्य
  • धारा 194-डी
    👉 उल्लंघन पर जुर्माने और दंड का प्रावधान
  • सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति (SCCORS)
    👉 सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की भावना के अनुरूप

फ्यूल पंप संचालकों को सख्त निर्देश

जिलाधिकारी ने जनपद के सभी पेट्रोल पंप संचालकों और स्वामियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं—

✔️ बिना हेलमेट पहने किसी भी दोपहिया वाहन चालक या पिलियन को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा।
✔️ सभी फ्यूल पंपों पर CCTV कैमरे हर समय सक्रिय रखे जाएंगे।
✔️ किसी भी विवाद की स्थिति में CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि फ्यूल पंप संचालकों की भूमिका इस अभियान में निर्णायक है।

जनता की सुरक्षा या जबरन सख्ती?

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह फैसला लोगों पर जबरन थोपा जा रहा है?
👉 प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह दंडात्मक नहीं, जीवन रक्षक अभियान है।
👉 हेलमेट सिर्फ कानून की मजबूरी नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा की ढाल है।

क्या बदलेगी सड़क संस्कृति?

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • जब पेट्रोल जैसी अनिवार्य सुविधा को हेलमेट से जोड़ा जाता है
  • तब नियम पालन स्वेच्छा से मजबूरी में बदल जाता है
  • और यही बदलाव सड़क सुरक्षा की असली कुंजी है

‘No Helmet No Fuel’ अभियान बिजनौर में सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाली हर जान को सुरक्षित रखने की कोशिश है।
अब सवाल यह नहीं कि हेलमेट पहनना है या नहीं—
👉 सवाल यह है कि आप सुरक्षित घर पहुंचना चाहते हैं या नहीं?

— डिजिटल न्यूज पोर्टल के लिए विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

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