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मुरादाबाद में रचा गया इतिहास: पहली बार गूंजी भगवान श्री परशुराम कथा, उमड़ा ब्राह्मण चेतना का सैलाब 

मुरादाबाद में रचा गया इतिहास: पहली बार गूंजी भगवान श्री परशुराम कथा, उमड़ा ब्राह्मण चेतना का सैलाब 

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद का भव्य आयोजन, हेरिटेज होटल बना धर्म–संस्कृति–संगठन का महासंगम

मुरादाबाद।
उत्तर प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में मुरादाबाद ने एक नया इतिहास रच दिया, जब भगवान श्री परशुराम जी की पावन कथा का आयोजन प्रदेश में पहली बार अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के तत्वावधान में किया गया। यह आयोजन न सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम रहा, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, सांस्कृतिक जागरण और वैचारिक चेतना का सशक्त मंच बनकर उभरा।

हेरिटेज होटल के भव्य सभागार में आयोजित इस कथा में सुप्रसिद्ध कथावाचक अमरनाथ दीक्षित ने भगवान श्री परशुराम के जीवन प्रसंगों को ऐसे ओजस्वी और भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। शौर्य, त्याग, तप और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक श्री परशुराम के आदर्शों ने पूरे वातावरण को ऊर्जा से भर दिया।

राष्ट्रीय हस्तियों की मौजूदगी, आयोजन को मिला विशेष गौरव

कार्यक्रम की शोभा उस समय और बढ़ गई जब मुख्य अतिथि श्री जुगल किशोर तिवारी, आईपीएस (पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक) ने अपने विचार रखे। उनके साथ संदीप बडोला (अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल) और अभिषेक कौशिक (पूर्व ओएसडी, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) जैसे विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाई।

अतिथियों ने कहा कि भगवान श्री परशुराम आज भी सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और राष्ट्रधर्म के सबसे सशक्त प्रतीक हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर समाज नई दिशा तय कर सकता है।

🏵️ संगठनात्मक शक्ति और अनुशासन का प्रभावी प्रदर्शन

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पी.एस. उर्फ नीटू उपाध्याय ने की, जबकि जिला महामंत्री मुदित उपाध्याय ने मंच संचालन करते हुए आयोजन को अनुशासित और प्रभावशाली स्वरूप दिया।

कथा में विनोद पांडे, हरीश दुबे गुरुजी, राजकुमार शर्मा, चंचल शर्मा, विशाल शुक्ला, शशांक शर्मा, अनुराग शर्मा, मुन्नू शर्मा, बंटी शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

विश्लेषण: धर्म से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का संदेश

यह आयोजन केवल धार्मिक कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्राह्मण समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त करने और युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद का यह प्रयास आने वाले समय में प्रदेश भर में ऐसे वैचारिक-सांस्कृतिक आयोजनों की मजबूत नींव रखता दिखाई देता है।

 निष्कर्ष

मुरादाबाद में आयोजित भगवान श्री परशुराम कथा ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब धर्म, संस्कृति और संगठन एक साथ आते हैं, तो समाज में नई चेतना का संचार होता है। यह आयोजन निस्संदेह ब्राह्मण एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ।

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