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सरदार पटेल जयंती पर ‘एकता यात्रा’ और ‘वंदे मातरम्’ सामूहिक गायन से गूंजा शहर

योगी ने गोरखपुर से दी राष्ट्रीय एकता की पुकार — “कोई मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं”
सरदार पटेल जयंती पर ‘एकता यात्रा’ और ‘वंदे मातरम्’ सामूहिक गायन से गूंजा शहर

मुख्य बिंदु :

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में हुए ‘एकता यात्रा’ और ‘वंदे मातरम्’ कार्यक्रम में शामिल

  • कहा — “हम सब धरती माता के पुत्र हैं, भारत की एकता के लिए हर बलिदान को तैयार रहना होगा”

  • प्रत्येक शिक्षण संस्थान में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा

  • ‘रन फॉर यूनिटी’ से लेकर ‘एकता यात्रा’ तक, पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय चेतना का संचार

  • सरदार पटेल को बताया — भारत की अखंडता के शिल्पी, स्वदेशी और स्वावलंबन के प्रेरणास्रोत

राष्ट्रीय एकता का संकल्प – गोरखपुर से गूंजा ‘वंदे मातरम्’

लखनऊ/गोरखपुर, 10 नवम्बर 2025 :
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती माह के अवसर पर आयोजित ‘एकता यात्रा’ और ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन में भाग लेकर राष्ट्रीय चेतना की अलख जगाई।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता, रानी लक्ष्मीबाई, सरदार पटेल और बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के चित्रों पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा —

“यह ‘एकता यात्रा’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वदेशी, स्वावलंबन और अखंड भारत के संकल्प की यात्रा है। सरदार पटेल ने अपने दृढ़ संकल्प से देश को जोड़ा — हम सबको उनके मार्ग पर चलना होगा।”

सरदार पटेल : भारत की एकता के शिल्पी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल केवल लौह पुरुष नहीं, बल्कि भारत माता के महान सपूत और एकता के वास्तुकार थे। उन्होंने रियासतों के विलय से भारत की नींव को मजबूत किया।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 31 अक्टूबर को अब राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
योगी ने कहा —

“जब गुजरात के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण हुआ, तब भारत की मिट्टी और लोहे ने एकजुट होकर एकता की मूर्ति को जन्म दिया।”

“रन फॉर यूनिटी” से “एकता यात्रा” तक : जागरण की श्रृंखला

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में ‘रन फॉर यूनिटी’ सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
अब हर विधानसभा क्षेत्र में 10 किलोमीटर लंबी ‘एकता यात्रा’ निकाली जा रही है, ताकि प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रीयता का भाव प्रबल हो।
उन्होंने कहा —

“यह यात्रा केवल दौड़ नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्यबोध और एकता का उद्घोष है।”

“वंदे मातरम्” – भारत की चेतना का मंत्र

योगी आदित्यनाथ ने ‘वंदे मातरम्’ को भारत की आत्मा बताया।
उन्होंने कहा —

“यह गीत वह मंत्र है जिसने भारत की सोई हुई चेतना को जगाया। जब-जब देश पर संकट आया, ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने हर दिल में देशभक्ति का संचार किया।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि

“जो आस्था राष्ट्र की एकता में बाधा बने, उसे किनारे रखना होगा। राष्ट्र सर्वोपरि है — कोई व्यक्ति, जाति या मजहब उससे बड़ा नहीं।”

हर विद्यालय में अनिवार्य होगा राष्ट्रगीत गायन

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब प्रदेश के प्रत्येक शिक्षण संस्थान में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा।
साथ ही विद्यालयों और कॉलेजों में सरदार पटेल के योगदान पर वाद-विवाद प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी, ताकि नई पीढ़ी में राष्ट्रीयता की भावना गहराई से जड़े जमा सके।

💬 कार्यक्रम में शामिल गणमान्यजन

इस अवसर पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।

🔹 विश्लेषणात्मक दृष्टि : गोरखपुर से संदेश, भारत के लिए दिशा

गोरखपुर की यह एकता यात्रा केवल स्मरण नहीं, बल्कि राजनीतिक-सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बनी।
योगी सरकार ने इस आयोजन के माध्यम से तीन प्रमुख संदेश दिए —

  1. राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण – शिक्षा, संस्कृति और कार्यक्रमों के जरिए देशभक्ति को जन-जन तक पहुंचाना।
  2. स्वदेशी और स्वावलंबन की नीति – सरदार पटेल के मूल विचारों को प्रधानमंत्री मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा से जोड़ना।
  3. एकता बनाम विभाजन की चुनौती – मजहब, जाति और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतों के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान।

🔸 निष्कर्ष : गोरखपुर से गूंजा अखंड भारत का संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश स्पष्ट था —

“अगर मां भारत के सम्मान पर कोई आंच आए, तो हम सब पुत्रों का कर्तव्य है कि उसके लिए तन-मन से खड़े हों।”

गोरखपुर से उठी यह ‘एकता यात्रा’ आज केवल सरदार पटेल के प्रति श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारत की अखंडता, स्वदेशी चेतना और नई पीढ़ी की राष्ट्रनिष्ठा का शंखनाद बन चुकी है।

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