“काशी में फिर गूंजा ‘हर हर महादेव’ — प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत, कल देश को 4 नई वंदे भारत ट्रेनों की सौगात”
पी एम फाइल फोटो
दो दिवसीय काशी दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, रोशनी से जगमगाया पूरा बनारस
मुख्य बिंदु (Highlights):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम काशी पहुंचे, दो दिवसीय दौरे की शुरुआत।
एयरपोर्ट से बरेका तक हर मोड़ पर ‘मोदी-मोदी’ और ‘हर हर महादेव’ के नारों से गूंजा शहर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेका में किया प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत।
8 नवंबर को पीएम देंगे देश को चार नई वंदे भारत ट्रेनों की सौगात।
वाराणसी–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार।
काशी में मोदी-मय माहौल: स्वागत में उमड़ी भीड़, छाया भक्तिभाव और देशभक्ति का रंग
वाराणसी, 07 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार की शाम अपने संसदीय क्षेत्र काशी पहुंचे तो शहर मानो दीपों की तरह जगमगा उठा। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से लेकर बरेका तक का मार्ग फूलों, रोशनी और नारों से गूंजता रहा। “हर हर महादेव” और “मोदी-मोदी” के जयघोष से पूरा बनारस स्वागत में सराबोर दिखा।
प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए रास्ते के दोनों ओर हजारों की भीड़ जुटी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपने ‘सांसद प्रधानमंत्री’ का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। हरहुआ, फुलवरिया फ्लाईओवर और गिलट बाजार जैसे प्रमुख मार्गों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
मुख्यमंत्री योगी ने बरेका में किया भव्य स्वागत
बरेका गेस्ट हाउस पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री का पारंपरिक स्वागत किया। शहर के प्रमुख स्थानों — संत अतुलानंद बाईपास, एफसीआई गोदाम, और बरेका गेट — पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत समारोह आयोजित किए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “काशी में प्रधानमंत्री का स्वागत केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह शहर की आत्मा का उत्सव है।”
देश को मिलेगी चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 8 नवंबर को देश को चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात देंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन होगी — वाराणसी से खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस, जो पूर्वांचल और बुंदेलखंड के बीच एक नई तेज़ रफ्तार कड़ी बनेगी।
नई ट्रेनों की सूची:
वाराणसी–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस (धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व की ट्रेन)
लखनऊ–सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस
फिरोजपुर–दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस
एर्नाकुलम–बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस
प्रधानमंत्री इन ट्रेनों को बनारस (पूर्व मंडुवाडीह) रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
धार्मिक पर्यटन और विकास को नई दिशा
वाराणसी–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस न केवल एक ट्रेन है, बल्कि यह ‘संस्कृति को गति’ देने वाला प्रतीक बनकर उभरेगी। यह ट्रेन काशी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ते हुए यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा प्रदान करेगी।
पर्यटन लाभ:
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई उड़ान।
छोटे व्यापारियों, टूर ऑपरेटरों और होटल उद्योग को सीधा लाभ।
यात्रियों को वर्तमान ट्रेनों की तुलना में लगभग 2 घंटे 40 मिनट की समय बचत।
रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह ट्रेन भारत की तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक पहचान का संगम प्रस्तुत करेगी।
काशी में उत्सव जैसा माहौल, हर ओर दिखा जनभावनाओं का ज्वार
प्रधानमंत्री के स्वागत में सजे मार्गों पर केसरिया और तिरंगे रंगों की रोशनी ने माहौल को भव्य बना दिया। हर चौराहे पर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे गूंजे। स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं।
काशी के नागरिकों के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि “अपने सांसद, अपने नेता और अपने नायक का उत्सव” बन गया।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण:
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं है। यह यात्रा “आस्था और आत्मविश्वास” का प्रतीक है — जहां धर्म, संस्कृति और प्रौद्योगिकी का संगम एक साथ देखने को मिलता है। वंदे भारत एक्सप्रेस के नए रूट न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएंगे बल्कि “विकसित भारत” के प्रधानमंत्री के विजन को भी धरातल पर उतारेंगे।
निष्कर्ष:
काशी में पीएम मोदी का यह दौरा जनभागीदारी, राष्ट्रभक्ति और विकास का संगम बन गया है। जहां एक ओर ‘हर हर महादेव’ के नारों से गूंजता बनारस श्रद्धा का प्रतीक दिखा, वहीं दूसरी ओर वंदे भारत ट्रेनों की सौगात ने भारत की प्रगति की नई गति का संदेश दिया।
✍️ लेख संपादन: अवनीश त्यागी शैली: डिजिटल न्यूज पोर्टल | विश्लेषणात्मक | लोकरुचिक श्रेणी: राजनीति / राष्ट्रीय विकास / धार्मिक पर्यटन