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कम राजस्व वसूली पर भड़कीं जिलाधिकारी जसजीत कौर — कहा, “अब सिर्फ चेतावनी नहीं, होगी कार्रवाई!”

कम राजस्व वसूली पर भड़कीं जिलाधिकारी जसजीत कौर — कहा, “अब सिर्फ चेतावनी नहीं, होगी कार्रवाई!”

👉 धारा 98 की भूमि बिक्री, खनन वाहनों की जांच, और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं — जिलाधिकारी ने दी सख्त चेतावनी
 बिजनौर | 27 अक्टूबर 2025 | संवाददाता रिपोर्ट

बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सोमवार शाम कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक राजस्व स्टाफ एवं कर-करेत्तर बैठक में राजस्व व्यवस्था की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी।
उन्होंने कहा —

“अब फाइलों में औपचारिक रिपोर्ट और कागजी वसूली नहीं चलेगी। जो विभाग अपने लक्ष्यों में पिछड़ रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय होगी। रैंकिंग गिराने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय है, और उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी जाएगी।”

जिलाधिकारी की यह सख्त टिप्पणी सुनते ही बैठक कक्ष में उपस्थित कई अधिकारियों के चेहरे उतर गए।

राजस्व विभाग पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सख्ती

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जिले में राजस्व वसूली का स्तर संतोषजनक नहीं है।
मण्डी, वाणिज्य कर, परिवहन, विद्युत, खनन और बाट-माप विभागों की प्रगति अपेक्षाकृत बहुत कम पाई गई है।
उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि—

  • अपने-अपने राजस्व लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें
  • बड़े बकायादारों की सूची बैंकों की सहायता से तैयार कर वसूली अभियान चलाया जाए।
  • यदि विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो सस्पेंशन व वेतन रोकने तक की कार्रवाई संभव है।

धारा 98 के तहत भूमि विक्रय के मामलों पर सख्त निगरानी

श्रीमती कौर ने तहसीलदारों और उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि—

  • भूमि विक्रय से संबंधित किसी भी प्रकरण में अनुमति पत्र तभी जारी किया जाए जब संपूर्ण जांच पूरी हो जाए।
  • यदि कोई भी अनुमति बिना परीक्षण या मानकों का उल्लंघन करते हुए दी गई, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा।
    उन्होंने कहा कि “धारा 98 के अंतर्गत अनुज्ञा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि अवैध भूमि क्रय-विक्रय पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।”

खनन परिवहन वाहनों की नंबर प्लेट पर जिलाधिकारी की निगाह

खनन से जुड़े वाहनों की बढ़ती अनियमितताओं पर डीएम ने उप संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) को सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने कहा—

“खनन करने वाले सभी वाहनों की नंबर प्लेट की जांच की जाए। यदि कोई प्लेट संदिग्ध, टूटी-फूटी या अपठनीय पाई जाए तो वाहन स्वामी पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई करें।”

डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि खनन से संबंधित किसी भी गड़बड़ी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी

💬 आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में ‘संतुष्टि मानक’ लागू

बैठक में डीएम ने आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। उन्होंने पाया कि कई मामलों में शिकायतों को “निस्तारित” दिखा दिया गया है, जबकि शिकायतकर्ता असंतुष्ट है।
उन्होंने कहा —

“शिकायत का निस्तारण तभी माना जाएगा जब शिकायतकर्ता स्वयं संतुष्ट होगा। विभागीय ‘टिक मार्क’ से नहीं, जनता की संतुष्टि से ही शिकायत समाप्त मानी जाएगी।”

उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि शिकायतों की अनदेखी जनता के भरोसे से खिलवाड़ है, और ऐसे मामलों को प्रशासनिक शिथिलता माना जाएगा।

लंबित वादों पर सख्त रुख — ‘न्याय में देरी, अन्याय के समान’

जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों को अब हर हाल में निपटाना होगा।

  • 5 वर्ष से अधिक पुराने वादों को तत्काल प्राथमिकता सूची में लाया जाए।
  • धारा 34 और 24 के प्रकरणों को समयसीमा में समाप्त किया जाए।
  • “अब देरी को लापरवाही नहीं, अपराध माना जाएगा,” डीएम ने कहा।

राजस्व लक्ष्य से पिछड़ने वाले विभागों पर गाज

जिलाधिकारी ने बताया कि कर-करेत्तर विभागों की रिपोर्ट में कई कमियां मिली हैं।
उन्होंने कहा —

“राजस्व वसूली शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी अधिकारी ने लापरवाही दिखाई तो विभागीय जांच के साथ उच्च अधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।”

डीएम ने सभी विभागों को 10 दिन की समयसीमा देते हुए कहा कि अगली समीक्षा बैठक में स्पष्ट परिणाम प्रस्तुत किए जाएं।

बैठक में प्रशासनिक सक्रियता का नया मॉडल

बैठक में मौजूद अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह,
एडीएम वित्त एवं राजस्व श्रीमती वान्या सिंह,
एडीएम न्यायिक अंशिका दीक्षित,
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट स्मृति मिश्रा सहित सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी की सख्त मॉनिटरिंग से बैठक में जवाबदेही और परिणाम-केंद्रित कार्यसंस्कृति का नया संदेश गया है।

विश्लेषण | ‘जसजीत मॉडल’ की प्रशासनिक सटीकता

बिजनौर की डीएम जसजीत कौर अपने “सटीक प्रशासनिक फैसलों और परिणाम-उन्मुख कार्यशैली” के लिए जानी जाती हैं।
उनकी यह बैठक केवल निर्देशों की औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन का वास्तविक रोडमैप साबित हो रही है।

  • राजस्व सुधार के साथ जवाबदेही तय करने की यह नीति
  • जनता की शिकायतों को प्राथमिकता देने की संवेदनशीलता
  • और विभागीय प्रदर्शन पर सीधे एक्शन का संकेत
    — तीनों मिलकर “जसजीत मॉडल ऑफ गवर्नेंस” को मजबूती दे रहे हैं।

🔸 निष्कर्ष (Editorial Verdict):

बिजनौर प्रशासन अब केवल कागज़ी रिपोर्टों पर नहीं, बल्कि परिणामों की ठोस कसौटी पर काम कर रहा है।
डीएम जसजीत कौर का यह संदेश स्पष्ट है —

“जो काम करेगा वही रहेगा, जो ढिलाई करेगा वह हटेगा।”

यह कदम न केवल जिले में राजस्व सुधार और पारदर्शिता को नया आयाम देगा, बल्कि प्रशासनिक तंत्र को जनहित के अनुरूप परिणाम-केन्द्रित बनाएगा।

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