गन्ना किसानों की बड़ी जीत! योगी सरकार ने सुनी बिजनौर की आवाज — बिलाई शुगर मिल से हटेंगे तीनों केंद्र
पूर्व सांसद राजा भारतेन्द्र सिंह की पहल से किसानों को राहत — मुख्यमंत्री ने दिए मिल परिवर्तन के आदेश, जल्द नई मिल से जुड़ेगा गन्ना केंद्र
जब किसान बोले — “भुगतान दो या मिल बदलो!” और लखनऊ तक पहुँची आवाज
बिजनौर विधानसभा क्षेत्र के बांटपुरा, कुतुबपुर गढ़ी और भगैन गांवों के गन्ना किसानों की वर्षों पुरानी मांग अब आखिरकार फलीभूत होती दिख रही है।
किसानों ने लगातार शिकायत की थी कि बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल, बिलाई समय पर गन्ने का भुगतान नहीं कर रही, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश था।
आंदोलन के बाद किसानों ने गन्ना आपूर्ति तक रोक दी — और अब उनकी यह जिद काम कर गई है।
राजा भारतेन्द्र सिंह बने किसानों की आवाज, सीधे पहुंचे सीएम योगी के पास
- पूर्व सांसद राजा भारतेन्द्र सिंह ने किसानों के ज्ञापन और गन्ना समितियों के प्रस्तावों को लेकर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। - उन्होंने विस्तार से बताया कि बिलाई मिल द्वारा भुगतान में हो रही देरी किसानों की आजीविका पर चोट है।
- किसानों के आंदोलन और संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रमुख सचिव गन्ना को कार्रवाई के आदेश दे दिए।
💬 “किसानों का धैर्य टूटने से पहले समाधान होना चाहिए” — सीएम योगी
लखनऊ में हाई-लेवल बैठक, हुआ अहम निर्णय
आज पूर्व सांसद राजा भारतेन्द्र सिंह ने
- प्रमुख सचिव गन्ना बीना कुमारी मीणा
- और गन्ना आयुक्त श्रीमती मिनिस्ती एस
से बापू भवन, लखनऊ में भेंट की।दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि
“इसी गन्ना सत्र में तीनों गन्ना क्रय केंद्र — बांटपुरा, कुतुबपुर गढ़ी और भगैन — को बिलाई मिल से हटाकर नई मिल से जोड़ दिया जाएगा।”
किसानों के लिए बड़ा बदलाव: अब समय पर भुगतान की उम्मीद
इस निर्णय से किसानों को तीन बड़ी राहतें मिलेंगी:
✅ समय पर भुगतान — अब गन्ना बेचने के बाद हफ्तों की देरी नहीं।
✅ नई मिल से बेहतर पारदर्शिता और सुविधा।
✅ स्थानीय स्तर पर किसानों की नाराज़गी में कमी और प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा।
विश्लेषण: किसान-सरकार समन्वय की मिसाल
यह फैसला सिर्फ मिल परिवर्तन नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन की पहचान है।
राजा भारतेन्द्र सिंह द्वारा किसानों की आवाज को सत्ता तक पहुँचाना दिखाता है कि जब
राजनीति “जन-सेवा” के रूप में सामने आती है, तब परिणाम भी किसानों के पक्ष में आते हैं।
🔍 “लखनऊ के निर्णय से बिजनौर के खेतों में मुस्कान लौट आई है।”
किसानों ने जताया आभार — “हमारी सुनवाई हुई, अब गन्ना नहीं अटकेगा”
स्थानीय किसानों ने कहा कि
“हम सालों से इंतजार कर रहे थे कि सरकार हमारी बात सुने।
राजा साहब ने हमारी पीड़ा मुख्यमंत्री तक पहुंचाई — अब उम्मीद है कि इस बार मेहनत का पूरा दाम समय पर मिलेगा।”
निष्कर्ष: बिजनौर मॉडल बन सकता है उदाहरण
बिजनौर के तीन गन्ना क्रय केंद्रों को नई मिल से जोड़ने का निर्णय आने वाले समय में
प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
यह दिखाता है कि —
🌱 “जहां किसान संगठित होते हैं और प्रतिनिधि संवेदनशील, वहां बदलाव तय है।”
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