मुरादाबाद से बड़ी पहल: गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने 75 टीबी रोगियों को गोद लिया

मोदी @75 – ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान में शिक्षा जगत का ऐतिहासिक संकल्प
हाइलाइट्स (Sharp Bullets)
- पीएम नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर 75 टीबी रोगियों को गोद
- गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने उठाया पोषण और देखभाल का जिम्मा
- वाइस चांसलर बोले – “टीबी का नाश केवल दवाओं से नहीं, संवेदनाओं से भी होगा”
- कुलसचिव का संदेश – “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास”
- डॉक्टरों, स्वास्थ्य विभाग और समाजसेवियों की मजबूत भागीदारी
- लक्ष्य – पोलियो की तरह टीबी को जड़ से खत्म करना
खबर का असर
मुरादाबाद, 17 सितम्बर 2025।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन को पूरे देश में सेवा पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने मुरादाबाद में ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय ने 75 टीबी रोगियों को गोद लेने का ऐलान किया। इन रोगियों को न सिर्फ पौष्टिक आहार मिलेगा, बल्कि उनके साथ नैतिक और भावनात्मक सहयोग भी रहेगा।
कुलपति का बयान
वाइस चांसलर प्रो. सचिन माहेश्वरी ने कहा:
👉 “हमारा विश्वविद्यालय सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, हम समाज के हर हिस्से के साथ खड़े हैं। टीबी रोगियों का दर्द हमारा दर्द है, और उन्हें ठीक करना हमारा मिशन।”
कुलसचिव का दृष्टिकोण
कुलसचिव गिरीश कुमार द्विवेदी ने साफ कहा:
👉 “जैसे पोलियो को इतिहास बना दिया गया, वैसे ही अब टीबी को मिटाना होगा। समाज तभी सशक्त होगा जब हर नागरिक स्वस्थ होगा।”
मेडिकल बिरादरी की मौजूदगी
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल, डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. विकास कुमार, डॉ. राजेश उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों ने भी हाथ बढ़ाया।
संचालन की जिम्मेदारी डीसी मोहम्मद जावेद ने निभाई।
विश्लेषण
- यह पहल महज औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला स्वास्थ्य आंदोलन है।
- शिक्षा संस्थान अगर ऐसे कदम उठाते रहें तो सरकार का 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य और मजबूत होगा।
- यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन जैसे अवसर सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और संकल्प का प्रतीक बन सकते हैं।
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय की यह पहल एक नई मिसाल है—
👉 विश्वविद्यालय अब केवल ज्ञान का मंदिर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और संवेदनाओं का प्रहरी भी है।
मुरादाबाद से उठा यह कदम पूरे प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा की लहर बन सकता है।












