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अवैध मिट्टी खनन पर सन्नाटा: सवालों के बाद भी बिजनौर प्रशासन की न जवाबदेही, न कार्रवाई

फॉलोअप जांच रिपोर्ट | प्रशासन की खामोशी जारी

अवैध मिट्टी खनन पर सन्नाटा: सवालों के बाद भी बिजनौर प्रशासन की न जवाबदेही, न कार्रवाई

बिजनौर। NHAI के नाम पर जनपद में कथित रूप से चल रहे बिना अनुमति मिट्टी खनन के मामले में सवाल उठे कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक न तो कोई आधिकारिक जवाब सामने आया है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई होती दिखाई दी है। यह प्रशासनिक चुप्पी अब खुद एक बड़ा सवाल बनती जा रही है।

पूर्व में सामने आई जांच रिपोर्ट में खनन विभाग, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन से 10 सीधे और तीखे सवाल पूछे गए थे, जिनका उद्देश्य जवाबदेही तय करना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न खनन अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की, न एडीएम स्तर से कोई जांच आदेश जारी हुआ और न ही अवैध डंपरों पर कोई रोक लगाई गई

जमीनी हालात जस के तस

सूत्रों के अनुसार,

  • चांदपुर रोड सहित शहर और आसपास के क्षेत्रों से
  • अब भी मिट्टी से भरे ओवरलोड डंपर लगातार गुजर रहे हैं
  • कहीं भी चेकिंग, सीजिंग या चालान की कार्रवाई नजर नहीं आ रही

यह सब उस स्थिति में हो रहा है, जब सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जनपद में मिट्टी खनन की सीमित परमिशन ही वैध हैं।

सवाल पूछे गए, फाइलें नहीं हिलीं

खनन अधिकारी से लेकर जिला प्रशासन तक को

  • अवैध खनन
  • परमिशन की स्थिति
  • ओवरलोड वाहनों
  • और राजस्व हानि

जैसे मुद्दों पर अवगत कराया गया, लेकिन न कोई लिखित बयान जारी हुआ, न कोई प्रेस नोट, न ही जांच कमेटी गठित की गई

राजस्व और पर्यावरण दोनों को नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का अवैध खनन

  • सरकारी राजस्व को भारी नुकसान
  • भू-क्षरण और पर्यावरणीय असंतुलन
  • सड़क हादसों की आशंका
    को लगातार बढ़ा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है।

क्या चुप्पी ही जवाब है?

अब हालात यह हैं कि
👉 सवालों के जवाब नहीं मिल रहे
👉 कार्रवाई नहीं हो रही
👉 और अवैध गतिविधियां जारी हैं

ऐसे में यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता कि या तो प्रशासन स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहा, या फिर इस पूरे खेल को मौन सहमति प्राप्त है

यह मामला अब सिर्फ अवैध मिट्टी खनन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के पालन की कसौटी बन चुका है।
अगर शीघ्र कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट जवाब सामने नहीं आता, तो यह चुप्पी खुद में एक फैसला मानी जाएगी।

अब देखना यह है कि—
बिजनौर प्रशासन जागता है या यह सन्नाटा ही व्यवस्था की पहचान बन जाएगा।

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