गुलदार का आतंक: महिला की मौत से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, शव रखकर धरना; कल ही शुरू हुआ “ऑपरेशन गुलदार”
बिजनौर/नजीबाबाद, 14 सितंबर 2025।
बिजनौर जिले के नजीबाबाद तहसील क्षेत्र में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को ग्राम इस्सेपुर में खेत पर चारा लेने गई महिला पर गुलदार ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मृतका की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने शव को उठाकर सीधे डीएफओ कार्यालय पहुंचाया और वहां धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले दो हफ्तों में चौथी मौत के बावजूद वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसान यूनियन भी अब इस आंदोलन में कूद पड़ी है और प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रही है।
घटनाक्रम
- इस्सेपुर गांव की महिला खेत में चारा लेने गई थी।
- गुलदार ने हमला कर महिला को मौत के घाट उतार दिया।
- परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन महिला मृत घोषित हुई।
- आक्रोशित ग्रामीण शव लेकर डीएफओ कार्यालय पहुंचे।
- दफ्तर से बाहर निकलने को तैयार नहीं हुए डीएफओ, जिससे गुस्सा और भड़का।
- किसान यूनियन ने कहा कि अगर कार्रवाई न हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।
कल ही शुरू हुआ “ऑपरेशन गुलदार”
ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ने और लगातार हो रही घटनाओं के बीच वन विभाग ने शनिवार को ही “ऑपरेशन गुलदार” शुरू किया था।
- अभियान का नेतृत्व वन संरक्षक (मुरादाबाद परिक्षेत्र) और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर कर रहे हैं।
- वन विभाग ने दावा किया है कि 72 घंटे के भीतर गुलदार को पकड़ लिया जाएगा।
- अभियान क्षेत्र में 6 पिंजरे लगाए गए, थर्मल ड्रोन से जंगल की सघन तलाशी ली जा रही है।
- डॉ. दक्ष गंगवार की टीम नजीबाबाद में डेरा डाल चुकी है।
- संवेदनशील गांवों में सुबह-शाम गश्त और जन-जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है।
गुस्से और उम्मीद के बीच ग्रामीण
- ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग ने पहले की घटनाओं के बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया, इसलिए यह मौतें हो रही हैं।
- किसान यूनियन ने सरकार से मुआवजे और सुरक्षा इंतज़ाम की मांग की है।
- दूसरी ओर, “ऑपरेशन गुलदार” ने ग्रामीणों में थोड़ी उम्मीद जगाई है कि अब शायद इस आतंक से राहत मिल सके।
विश्लेषण: प्रशासन की असली परीक्षा
- ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है और आंदोलन की शक्ल ले चुका है।
- वन विभाग पर भारी दबाव है कि वह 72 घंटे की तय सीमा में गुलदार को पकड़कर लोगों का भरोसा वापस लाए।
- अगर अभियान असफल रहा तो प्रशासन को बड़े जनांदोलन और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
बिजनौर में हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं। एक ओर ग्रामीण और किसान यूनियन गुस्से में हैं, दूसरी ओर वन विभाग “ऑपरेशन गुलदार” के जरिए अपनी साख बचाने और जानमाल की रक्षा करने की चुनौती से जूझ रहा है।
अब सबकी निगाहें आने वाले 72 घंटे पर टिकी हैं—क्या गुलदार पकड़ में आएगा या फिर ग्रामीणों का गुस्सा और भड़ककर बड़े आंदोलन का रूप ले लेगा?











